युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। डीएस चौहान को देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश का डीजीपी बनाने की चर्चा से ही पुलिस विभाग में जहां हडक़ंप मच गया था वहीं प्रदेश की जनता में खुशी देखी गई। क्योंकि प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जनपदों में वो जिला पुलिस प्रमुख रह चुके हैं। जनता उनकी कार्यप्रणाली से भलीभांति परिचित है। डीएस चौहान गाजियाबाद और गौतमबुद्घनगर में उस समय तैनात किये गये थे जब वहां अपराधों की बाढ़ आई हुई थी, लेकिन डीएस चौहान की तैनाती के बाद अपराधियों ने जिला छोड़ दिया था। जब डीएस चौहान का नाम डीजीपी के लिए चल रहा था तभी से कुख्यात माफियाओं में खौफ दिखाई देना शुरु हो गया था। लोगों का कहना है कि डीएस चौहान को पूर्णकालिक डीजीपी की जिम्मेदारी दी गई तो प्रदेश में अपराधों में नियंत्रण होगा और सभी एक सुरक्षित माहौल मिलेगा। पुलिसकर्मी भी सुधर जाएंगे क्योंकि डीएस चौहान एक सख्त पुलिस अधिकारी हैं। उन्हें फील्ड से लेकर हर क्षेत्र की जानकारी है। इसी वजह से डीएस चौहान का जैसे ही नाम चला तो आम लोगों में खुशी और पुलिस में हडक़ंप मच गया। डीएस चौहान 1988 बैच के आईपीएस हैं और गौतमबुद्घनगर, गाजियाबाद, आगरा, सहारनपुर, बुलंदशहर, रामपुर और प्रतापगढ़ के पुलिस कप्तान रह चुके हैं। झांसी रेंज के डीआईजी और बरेली जोन के आईजी भी रह चुके हैं। दो बार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर वर्ष 2006 से 2011 के बीच ब्यूरो आफ सिविल एविएशन में डीआईजी और 2016 से 2020 के बीच सीआरपीएफ में आईजी व एडीजी केपद पर तैनात रहे।
प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में वे लखनऊ में भी तैनात रह चुके हैं। प्रदेश के स्थायी डीजीपी का फैसला संघ लोक सेवा आयोग करेगा। इसके लिए प्रदेश सरकार पैनल मांगेगा। पैनल में 30 साल की सेवा पूरी कर चुके सभी आईपीएस अफसरों की सूची यूपीएससी को भेजी जाएगी। उनमें से वरिष्ठता, सत्यनिष्ठा और चरित्र पंजिका के आधार पर तीन नामों का चयन कर यूपीएससी राज्य सरकार को भेज देता है। राज्य सरकार उन तीन में से किसी एक को डीजीपी बना सकती है।