आशित त्यागी
गाजियाबाद (युग करवट)। जैसा कि हमने कल लिखा था कि नगर निगम के अधिकारी नगर निगम अधिनियम की अनदेखी करते हैं। ऐसा ही डीएम सर्किल रेट से किराया या टैक्स वसूलने के मामले में भी हो रहा है। सात जुलाई 2023 को हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में नगर आयुक्त ने टैक्स वृद्घि को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं रखा था। तब बोर्ड ने स्वत: संज्ञान लेते हुए चर्चा की और दस प्रतिशत टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी थी। यह बढ़ोत्तरी एक अप्रेल 2023 से लागू हो गई थी। नगर आयुक्त ने डीएम सर्किल रेट से टैक्स बढ़ाने के लिए प्रस्ताव बनाकर बिना नगर निगम के बोर्ड से स्वीकृति के बिना शासन को भेज दिया था। इस प्रस्ताव पर शासन के नगर विकास अनुभाग-9 के अनुसचिव द्वारा गाजियाबाद नगर निगम जो पत्र भेजा गया था उसमें स्पष्टï तौर पर लिखा गया था कि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 174 व उत्तर प्रदेश नगर निगम संपत्ति कर नियमावली-2000 के संशोधित नियम -4क एवं 4ख में दिए गए प्रावधानों के प्रदत्त अधिकारों के दृष्टिïगत स्व स्तर से नियमानुसार संपत्ति कर की न्यूनतम मासिक किराया दर निर्धारित करें। यहां सबसे महत्वपूर्ण यह है कि न्यूनतम शब्द का इस्तेमाल किया गया है। अधिकतम का जिक्र नहीं है।
शासन द्वारा नगर निगम अधिनियम की जिस धारा 174 का उल्लेख किया गया है उसके अनुसार ऐसे भवन या भूमि की दशा में जो खंड क के अंर्तगत ना आती हो, भवन के करपेट एरिया या भूमि के क्षेत्र पर यथा स्थिति भवन के मामले में क्षेत्र का प्रति फुट पर किराए की प्रायोज्य न्यूनतम मासिक दर से गुणा करने पर प्राप्त मूल्य का 12 गुणा और इस प्रायोजन के लिए प्रति वर्ग फुट किराए की न्यूनतम मासिक दर ऐसी होगी, जैसी नगर आयुक्त द्वारा प्रत्येक दो वर्ष में एक बार ही भवन या भूमि की अवस्थिति भवन निर्माण की प्रकृति पर चार डीएम आधार बताए गए हैं।
पहला आधार भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 के प्रायोजन के लिए जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित सर्किल रेट है। दूसरा आधार ऐसे भवन, भूमि के लिए उस क्षेत्र में किराए वर्तमान न्यूनतम दर।
तीसरा आधार ऐसे अन्य कारणों के आधार पर और ऐसी रीति से जो विहित की जाए निर्धारित की जा सकती है। चौथा आधार इसमें बताया गया है कि प्रतिबंध यह है कि यदि उपयुक्त रीति के हिसाब लगाने पर निगम की राय में किसी असाधारण परिस्थिती के कारण किसी भवन का वार्षिक मूल्य अधिक होता हो तो निगम वार्षिक मूल्य के रूप में कोई ऐसी कम धनराशि भी निश्चित कर सकती है जो उसे न्याय संगत प्रतीत हो। यहां भी न्यूनतम की बात करते हुए डीएम सर्किल रेट को लागू करने के आधार और नियम बताए गए हैं। इस हिसाब से गाजियाबाद नगर निगम जो जिस डीएम सर्किल रेट की बात कर रहा है वह तथ्यहीन मानी जाएगी। यह भी समझ लिजिए कि अधिनियम में संपत्ति कर के लिए किराया निर्धारण के तीन स्पष्टï आधार बताए गए हैं। इसमें से गाजियाबाद नगर आयुक्त ने केवल पहला ही आधा चुना है। जबकि अधिनियम कहता कि बाकि तीन आधारों पर भी काम किया जाना चाहिए।
नगर आयुक्त को दूसरे और तीसरे आधार पर संपत्ति कर में वृद्घि का प्रस्ताव बनाना चाहिए था। इस पूरे प्रकरण में देखें तो तीन से चार गुना कर बढ़ाया जाना उचित नहीं है। यदि ऐसा होता है तो लोगों में नाराजगी ही पनपेगी। यह भी एक नियम है कि जो पत्र शासन से आता है उसे सदन में रखना जरूरी होता है मगर गाजियाबाद नगर निगम के अधिकारी इस नियम की भी अनदेखी करते हैं। इस साल नौ जनवरी की बैठक में यह प्रस्ताव नही रखा गया। इसके बाद 15 फरवरी को हुई बोर्ड की बैठक में मेयर व पार्षदो ने संपत्ति कर बढ़ाने का विरोध किया था। बैठक में तय हुआ था कि बिना सदन से पास किए टैक्स वृद्घि ना की जाए। मगर नगर निगम के अधिकारियों ने एक अप्रेल से टैक्स वृद्घि लागू कर दी जो सदन की अवहेलना है।