वरिष्ठ संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। बेशक, शहर की सबसे प्राचीन श्री सुल्लामल रामलीला कमेटी में विधिवत मंचन शुरू हो गया हो, लेकिन कहीं पर कुछ झोल जरूर नजर आ रहा है। यही कारण है कि डिप्टी रजिस्ट्रार को कार्यालय बार-बार श्री सुल्लामल रामलीला कमेटी को पत्र भेजकर जवाब मांग रहा है। सुल्लामल रामलीला कमेटी को भेजे गए पत्र महामंत्री मनोज गोयल बंटी को प्रेषित किए जा रहे हैं। पत्रों में निर्वाचन से संबंध में अभिलेख एवं सदस्यता सूची पंद्रह दिन के अंदर भेजने के लिए कहा गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय से आए पत्र के बाद इस बात में कोई संदेह नहीं है कि मनोज गोयल बंटी ही श्री सुल्लामल रामलीला कमेटी के महामंत्री पद पर हैं। दरअसल, श्री सुल्लामल रामलीला कमेटी पिछले काफी अरसे से विवादों में उलझी है। कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अजय बंसल पूर्व में ही पूरी कमेटी को सवालों के घेरे में ले चुके हैं।
वह बिना किसी शर्त रामलीला कमेटी का चुनाव कराने की मांग करते रहे हैं। रामलीला कमेटी के वरिष्ठ उपप्रधान मिथेलश गुप्ता भी अजय बंसल से ही इत्तेफाक रखते हैं। श्री सुल्लामल रामलीला कमेटी को पूर्व में ही डिप्टी रजिस्ट्रार ने कालातीत घोषित किया हुआ है। हां, फिलहाल उसे मंचन कराने का अधिकार दिया हुआ है और निर्वाचन कराए जाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एक विवाद यह भी है कि कमेटी के कुछ सदस्य मनोज गोयल बंटी के महामंत्री पद को लेकर संशय में है। ऐसे सदस्यों का मानना है कि मनोज गोयल बंटी पूर्व में ही इस्तीफा दे चुके हैं। बहरहाल, डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा यह माना गया है कि कालातीत कमेटी में किसी का भी इस्तीफा स्वीकार करने का अधिकार किसी को भी नहीं दिया गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार इसी तर्क को मानते हुए लगातार मनोज गोयल बंटी को ही महामंत्री मानते हुए पत्र व्यवहार कर रहे हैं। 17 सितंबर को आया पत्र इस का सबसे ताजा उदाहरण है।
पत्र में डिप्टी रजिस्ट्रार महामंत्री मनोज गोयल को संबोधित करते हुए लिखते हैं कि पूर्व में 5 अगस्त को भी उन्हें एक पत्र लिखा गया था। इसमें समिति के निर्वाचन के संबंध में संबंधित अभिलेख एवं सदस्यता की सूची उपलब्ध कराए जाने को कहा गया था। 17 सितंबर को लिखे गए पत्र में भी डिप्टी रजिस्ट्रार ने सदस्यों की सूची एवं अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश महामंत्री मनोज गोयल बंटी को दिए हैं।
पत्र में यह भी लिखा गया है कि कालातीत की अवधि में प्रबंध समिति द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय विधिनुकूल नहीं है। ध्यान रहे कि पूर्व में 28 जुलाई को लिखे गए एक पत्र में भी डिप्टी रजिस्ट्रार ने 14 सितंबर 2018 को हुए निर्वाचन के अनुसार वीरेन्द्र कुमार वीरो को प्रधान, शिवओम बंसल को वरिष्ठ उपप्रधान, संजीव मित्तल को कनिष्क उपप्रधान, मनोज गोयल को महामंत्री, दिनेश शर्मा को महामंत्री, आलोक गर्ग को ऑडिटर और अनिल चौधरी को कालातीत कोषाध्यक्ष माना था।