युग करवट संवाददाता
नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ ने कहा कि भारत में फैले कोरोना वायरस के वैरिएंट 44 देशों में पहुंच चुके हैं। साथ ही डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में भारत में कोरोना महामारी के इस कदर फैलने के पीछे राजनीतिक और धार्मिक आयोजनों को कारण बताया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का कहना है कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में भारत के वैरिएंट के बारे में नहीं कहा गया है।
भारत में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने की प्रमुख वजहों में पिछले महीने हुए चुनाव और धार्मिक अनुष्ठान भी हैं। यह बात विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कही गई है। कोरोना को लेकर डब्ल्यूएचओ की तरफ से बुधवार को अपडेट रिपोर्ट जारी की गई है। जिसमें भारत में कोरोना संक्रमण बढऩे के पीछे कई संभावित वजह हैं।
हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने किसी इवेंट का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कहा कि कई धार्मिक और राजनीतिक इवेंट्स में भारी भीड़ जुटना भी संक्रमण बढऩे की वजहों में शामिल है। इन इवेंट्स में कोताही बरती गई। डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा है कि संक्रमण बढऩे में इन फैक्टर्स की कितनी भूमिका रही, इस बारे में स्थिति साफ नहीं है।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि भारत में कोरोना का बी 1.617 वैरिएंट पहली बार अक्टूबर 2020 में सामने आया था। यहां कोरोना के मामलों और मौतों में दोबारा बढ़ोतरी से बी1.617 और बी 1.1.7 जैसे कुछ दूसरे वैरिएंट्स को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के वीकली अपडेट में कहा गया है कि भारत के कोरोना पॉजिटिव सैंपल्स में से 0.1 प्रतिशत को ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन शेयरिंग ऑल इन्फ्लूएन्जा डेटा पर सीक्वेंस किया गया था। ताकि कोरोना वैरिएंट्स का पता लगाया जा सके। इसमें सामने आया कि बी 1.1.7 और बी 1.612 जैसे कई वैरिएंट्स की वजह से भारत में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई। यह वैरिएंट अब 44 देशों में फैल चुका है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक अप्रैल के आखिर तक भारत में कोरोना के 21 प्रतिशत केसों में बी 1.617.1 वैरिएंट और 7 प्रतिशत में बी 1.617.2 पाया गया। यह बात भी सामने आई कि दूसरे वैरिएंट्स के मुकाबले इन दोनों वैरिएंट्स की ग्रोथ रेट काफी ज्यादा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत के बाद बी 1.617 के सबसे ज्यादा मामले ब्रिटेन में आए हैं। दुनियाभर में कोरोना की स्थिति को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि पिछले हफ्ते संक्रमण के नए मामलों और मौतों में थोड़ी कमी आई है। इस दौरान 55 लाख नए केस आए और 90,000 लोगों की जान गई। कुल केसों में 50 प्रतिशत मामले और 30 प्रतिशत मौतें भारत में हुईं।