– पुलिस की पिटाई से व्यापारी की मौत का मामला, राजनीति गरमाई –
प्रमुख संवाददाता
लखनऊ। एक ओर जहां भाजपा की ओर से प्रदेश में कानून का राज होने का दावा किया जा रहा है, वहीं मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में सामने आई पुलिस की हैवानियत से सारे दावों पर पानी फिर गया। मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में हुए विकास का जायजा लेने आए कानपुर के एक युवा व्यावसायी मनीष गुप्ता की पुलिसकर्मियों की पिटाई से मौत हो गई।
विधानसभा चुनाव से ऐन पहले हुई इस घटना से विपक्ष के हाथ एक मुद्दा मिल गया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज कानपुर में मृतक व्यावसायी के परिजनों से मुलाकात की। अखिलेश के पहुंचने से पहले पुलिस ने पीडि़त परिवार को मकान के भीतर कर दरवाजा बंद कर दिया। इससे काफी समय तक अखिलेश दरवाजे के बाहर ही खड़े रहे लेकिन दबाव पडऩे पर अखिलेश से परिजनों की मुलाकात कराई।
अखिलेश के पहुंचने से पहले सपा कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। कानपुर पहुंचे अखिलेश यादव ने कहा कि मनीष गुप्ता कांड की हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराई जाए। दोषी अधिकारी सिपाहियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। परिवार को दो करोड़ का मुआवजा मिले।
ठोंको नीति के कारण हो रहा है
अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी 20 लाख की मदद कर रही है। ये पुलिस कप्तान वही हैं जिन्होंने अमरोहा में बूथ लूटा था। एसएसपी और डीएम की वीडियो को पूरे देश ने देखा है। अखिलेश ने कहा कि योगी राज में पुलिस सुरक्षा नहीं है। पुलिस लोगों की जान ले रही है। यह सब योगी सरकार की ठोको नीति के कारण हो रहा है। ठोंको..ठोंको…और ठोंको… पुलिस लोगों को ठोंक रही है। मनीष गुप्ता के शव का तड़के चार बजे अंतिम संस्कार करा दिया गया।
परिजनों ने की सीबीआई जांच की मांग
मृतक प्रॉपटी डीलर मनीष गुप्ता के परिजनों ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। मृतक की पत्नी मीनाक्षी ने कहा कि यूपी पुलिस की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है। पुलिसवालों ने ही उनके पति की हत्या की है। उन्होंने घटना की सीबीआई जांच की मांग की है। वहीं, अखिलेश यादव ने भी घटना की जांच सीबीआई से कराने और मृतक के परिजनों को दो करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग की।
मायावती ने भी की सीबीआई जांच की मांग
बसपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी आज गोरखपुर में कानपुर के युवा व्यापारी की पिटाई से हुई मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि यूपी सीएम के गृह जनपद गोरखपुर की पुलिस द्वारा तीन व्यापारियों के साथ होटल में बर्बरता व उसमें से एक की मौत के प्रथम दृष्टया दोषी पुलिसवालों को बचाने के लिए मामले को दबाने का प्रयास घोर अनुचित है। घटना की गंभीरता व परिवार की व्यथा को देखते हुए मामले की सीबीआई जांच जरूरी है।
मायावती ने कहा कि आरोपी पुलिसवालों के विरूद्ध पहले हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं करना किन्तु फिर जनआक्रोश के कारण मुकदमा दर्ज होने के बावजूद उन्हें गिरफ्तार नहीं करना, सरकार की नीति व नीयत दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सरकार पीडि़ता को न्याय, उचित आर्थिक मदद व सरकारी नौकरी दें।
मुख्यमंत्री के दखल के बाद मामला दर्ज
वहीं, बुधवार देररात को प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता की मौत के मामले में 6 पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज कर लिया गया। आईपीसी की धारा-302 के तहत मामला दर्ज किया गया। लेकिन इस घटना के बाद पुलिस की ओर से मैनेज करने की कोशिशें की गई। जब बात मुख्यमंत्री तक पहुंची तो उन्होंने तुरंत मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। उसके बाद ही मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
पीएम रिपोर्ट से खुली पुलिस की झूठी कहानी
प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने गोरखपुर पुलिस की झूठी कहानी की पोल खोल दी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला है कि मनीष के सिर, चेहरे और शरीर पर गंभीर चोट के निशान हैं। मनीष के सिर के अगले हिस्से पर तेज प्रहार किया गया, जिससे उनके नाक के पास से खून बह रहा था। हालांकि, पुलिस ने घटना के बाद अपने पहले बयान में इसे हादसे में हुई मौत बताया था।