युग करवट संवाददाता
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर ट्विन टावर खड़ा करने वाले आरके अरोड़ा ने बताया कि जिस दिन ट्विन टावर गिराया जाना था उस दिन पूरी रात वह सो नहीं पाए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता थी कि ट्विन टावर को ध्वस्त करते समय वहां रह रहे लोगों को कोई नुकसान ना हो। एक टीवी चैनल को दिए अपने साक्षात्कार में उन्होंने इस बात का खुलासा किया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने बिल्डिंग बनाने में कोई भ्रष्टाचार और नियमों का उल्लंघन नहीं किया है। उनके अनुसार नोएडा प्राधिकरण के नियमों के तहत उन्होंने पैसा जमा करके बिल्डिंग का निर्माण कराया। उन्होंने कहा कि ट्विन टावर गिरना उनके लिए बहुत ही दुखदाई रहा। इस घटना से वह बहुत दुखी है लेकिन वह अपने आने वाले प्रोजेक्ट के खरीदारों के हित को ध्यान में रखते हुए भवन निर्माण के कार्य में जी-जान से जुटे हैं, तथा सभी खरीदारों को तय समय पर उनका फ्लैट का पोजीशन दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ट्विन टावर बनाने के लिए उनके और उनके ग्रुप की तरफ से कोई अनियमितता नहीं बरती गई। उन्होंने कहा कि वह 40 वर्ष से कंस्ट्रक्शन लाइन में है। उन्होंने मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम के विभिन्न प्राधिकरणो के साथ काम किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने 70 हजार से ज्यादा फ्लैट बनाकर ग्राहकों को दिया है। उन्होंने तय समय पर उच्च गुणवत्ता के साथ भवन निर्माण किया तथा लोगों को समय पर डिलीवरी दिया। इसलिए लोग उनकी कंपनी पर विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा कि ट्विन टावर ध्वस्त होने की वजह से आगे आने वाले प्रोजेक्टो के ऊपर कोई असर नहीं पड़ेगा तथा उन्हें तय समय से पोजीशन दिया जाएगा। सभी प्रोजेक्ट के ऊपर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के अधिकारियों ने नियम के तहत ट्विन टावर बनाने को अनुमति दी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ट्विन टावर बनाने में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। यह आरोप निराधार है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्विन टावर को इसके तोडऩे का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि अपार्टमेंट एक्ट का उल्लंघन हुआ है। लेकिन उन्होंने नोएडा प्राधिकरण के नियमों के तहत सभी तरह के सरचार्ज जमा कराकर ट्विन टावर बनाने की अनुमति ली थी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जो भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं उसकी जांच हो रही है। जांच के बाद सभी बातें साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि ट्विन टावर को तुड़वाने के लिए उन्होंने एडिफाई इंजीनियरिंग कंपनी को हायर किया था तथा उन्होंने इसे सेफ तरीके से गिराया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ट्विन टावर का मलवा एडीफाई इंजीनियरिंग कंपनी उठाएगी। उन्होंने कहा कि ट्विन टावर जहां पर बना था, वह जगह उनकी कंपनी की है। आगे उस जगह पर क्या होना है यह वहां रह रहे लोगों, नोएडा प्राधिकरण तथा उनकी कंपनी के अधिकारी बैठकर तय करेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि ट्विन टावर अवैध रूप से खड़े कर दिए गए, यह बात गलत है। वहां पर पहले से ही दो टावर बनाना तथा उन्होंने कहा कि उक्त प्रोजेक्ट में 17 टावर बनने थे। फेस-वन में हमने 15 टावर बनाए, दूसरे फेस में हमने दो टावर बनाने थे। उसी समय सरकार की वर्ष 2014 में एफएआर की पॉलिसी आई। उसी नियम के तहत पैसे जमा करा करके हमने भवन बनाया।