नगर संवाददाता
गाजियाबाद। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने आरोप लगाया है कि गाजियाबाद नगर निगम संपत्ति नियमावली और नगर निगम अधिनियम के विपरीत जाकर टैक्स में तीन से चार प्रतिशत की वृद्घि करने की हठ कर रहा है। गाजियाबाद नगर निगम ने वर्ष 2001-02 से ही निगम सदन द्वारा नगर निगम अधिनियम की धारा 174 ख के तहत संपत्ति कर निर्धारण के लिए किराए के रेट तय किए गए थे।
राजेन्द्र त्यागी का कहना है कि गाजियाबाद नगर निगम के अधिकारी टैक्स से अर्जित धन से ही नंगर निगम को चलाना चाहते हैं। इसके लिए आय के दूसरे साधनों पर ध्यान दिया ही नहीं जाता। बार-बार शहर के नागरिकों पर बेवजह का बोझ डालने के लिए गलत तरीके से टैक्स बढ़ाने का हठ किया जाता है। गाजियाबाद नगर निगम के अधिकारियों ने रमतेराम रोड़ पर शोपिंग काम्पलैक्स बनाया जिसकी लागत 27.33 करोड़ रूपए थी। इसी तरह नेहरूनगर में ऑडिटोरियम बनाया जिसके निर्माण में 58.85 करोड़ रूपए खर्च किए गए। दोनों की कुल लागत ८६.१८ करोड़ रूपए होती है। आज तक नगर निगम इन दोनों संपत्तियों को डीएम सर्किल रेट के हिसाब से किराए पर नहीं उठा पाया है।
राजेन्द्र त्यागी ने कहा कि अपनी संपत्ति को नगर निगम डीएक सर्किल रेट से किराए पर उठा नहीं पा रहा है मगर नागरिकों से इसी हिसाब से टैक्स चाहता है। नगर निगम अधिनियम १९५९ की धारा 174 क, ख व ग के अनुसार समयानुसार, 25, ३२.५ व 40 प्रतिशत की छूट मिलनी चाहिए जो गाजियाबाद नगर निगम अब तक भी नहीं दे रहा है। गाजियाबाद नगर निगम द्वारा संपत्ति टैक्स की गणना में कारपेट एरिया आधारित रेट नियम से ज्यादा लेता है। नगर निगम की ऐसी कई अनिमितताओं को राजेन्द्र त्यागी ने उजागर किया है।