नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। कल से रुक-रुक हो रही बारिश के कारण मेरठ रोड बदहाल हो गया है। सडक़ों पर बारिश के कारण गड्डे हो गए हैं, तो नाले ओवर फ्लो होने के कारण जगह-जगह जलभराव हो गया है। इन मुश्किलों को शिवभक्त बोल बम बोल का जयघोष करते हुए आसानी से पार कर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। शिविर संचालकों को खाना बनाने तक में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पानी शिविरों के अन्दर तक आ चुका हैं। ऐसे में तख्त पर शिवभक्तों को रुकना पड़ रहा है। हालांकि, कांवड़ यात्रा को देखते हुए हाल ही में नगर निगम ने मेरठ रोड के गड्डों को भरा था, लेकिन बारिश के कारण सडक़ों में फिर से गड्ढे हो गए हैं। नई बनाई सडक़ भी जगह-जगह से टूटने लगी है। गड्ढों से निकली बजरी रोड पर फैल गई है, तो वहीं नाले ओवरफ्लो होने से गंदा पानी भी सडक़ों पर जमा हो रहा है। इतना ही नहीं रोड पर जगह-जगह लगे मिट्टी के ढेर भी हटाए नहीं गए, जो अब बारिश के कारण कीचड़ में तब्दील हो गए हैं। हालांकि जेसीबी द्वारा इसकी सफाई कराई जा रही है, लेकिन बारिश की वजह से कीचड़ को हटाने में दिक्कतें आ रही हैं।
ट्रैफिक संभालने में पुलिस कर्मियों को करनी पड़ रही है मशक्त
कांवडिय़ों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मेरठ रोड को बंद कर दिया गया है। राजनगर एक्सटेंशन से आने वाले यातायात को सीधे एलएलटी की ओर डायवर्ट किया गया है, जिसकी वजह से ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को वाहन चालकों को समझाना पड़ रहा है। कई वाहन चालक तो पुलिस कर्मियों से भिड़ भी गए और जबरदस्ती मेरठ रोड पर जाने के लिए अड़े रहे।
केदारनाथ मंदिर की झांकी बनी उत्सकुता का केन्द्र
कांवडिय़ों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। शिवभक्त अपनी कांवड़ों को विभिन्न स्वरूपों में सजाकर ला रहे हैं। हरियाणा का एक ग्रुप पूरी केदारनाथ मंदिर की झांकी का प्रतीकात्मक रूप बनाकर ला रहा है।
भगवा के साथ दिख रही तिरंगे झंडे की शान
मेरठ रोड पर अब भगवा रंग दिखाई दे रहा है। शिवभक्त बोल बम का जयकारा करते हुए निकल रहे हैं। वहीं, इस भगवा रंग के साथ अब तिरंगे झंडे की शान भी दिखाई दे रही है। कोई कांवडिय़ा अपनी कांवड़ में तिरंगा झंडा लगा का ला रहे हैं, तो कोई अपनी पूरी कांवड़ को ही तिरंगे झंडे में लपेट कर चल रहा है।
देश की शान को नहीं झुकने देना है
अपने पूर्व फौजी पिता और खुद वर्तमान में फौजी अपनी पहली कांवड़ लेकर आ रहा है। कांवड़ के साथ-साथ फौजी के साथ चल रहा दल अपने साथ तिरंगा लेकर चल रहा है। कांवड़ ला रहे फौजी ने बताया कि उनके पिता की इच्छा थी कि मैं भी कांवड़ लेकर आऊं, उनकी यही इच्छा पूरी करने के लिए वह इस बार पिता के साथ कांवड़ लेकर आ रहे हैं।
तीन साल से बच्चियां ला रही कांवड़
अपने परिवार सहित दिल्ली जहांगीरपुरी की दो बच्चियां पिछले तीन साल से कांवड़ ला रही हैं। इन बच्चियों में से एक की उम्र महज छह साल और दूसरी की दस साल है। अपनी छोटी से कांवड़ में यह बच्चियां जल भर अपने माता-पिता के साथ कांवड़ लेकर निकली हैं। लेकिन, सफर की थकान इन बच्चियों के चेहरे से पूरी तरह से गायब है।
शिविरों में मौजूद हैं स्नैक से लेकर लंच-डिनर
शिविरों में खाने-पीने की भी पूरी व्यवस्था की गई है। शिविर में बे्रकफास्ट से लेकर डिनर की व्यवस्था है। शिविर संचालक ने बताया कि सुबह नाश्ते में मठरी, नमकपारे, ब्रेड पकौड़े आदि से कावंडिय़ों को नाश्ता कराया जाता है, जो सुबह चार बजे से शुरू हो जाता है। आठ बजे के बाद दूध और केले, इसके बाद लंच में पूरी सब्जी, रोटी रायता और कई तरह की सब्जियां व चावल आदि बनाए जाते हैं। दोपहर बाद गोलगप्पे, टिक्की, पावभाजी, चाउमीन आदि और डिनर में भी विभिन्न प्रकार के पकवान बनते हैं, हर बार मेन्यू बदला जाता है।