युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। दशहरा बीत जाने के बाद से भाजपा की चुनावी तैयारियां तेज हो गई है। आगामी दिनों दिल्ली में एक के बाद एक ताबड़तोड़ बैठकें होंगी। इन बैठकों में टिकट वितरण पर चर्चा के साथ ही करीब एक चौथाई सीटों पर टिकट फाइनल किए जाएंगे। पार्टी के राष्टï्रीय अध्यक्ष ने यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश के सभी बड़े नेताओं के साथ मंत्रणा का दौर शुरू कर दिया है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि इस बार पच्चीस फीसदी विधायकों का टिकट कटना तय है। कई विधायक ऐसे विधायकों का टिकट काटा जाएगा, जो पार्टी के लिए फजीहत बने। भाजपा के विरोध में लगातर बयान देने वाले ऐसे एक दर्जन विधायकों का चयन कर लिया गया है। ऐसे विधायकों का टिकट भी काटा जाएगा जो अपनी ही पार्टी की सरकार होते हुए जिला मुख्यालय पर धरना आदि दिया था। सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए थे।
कई विधायकों के बारे में उत्तर प्रदेश इकाई की ओर से शीर्ष नेतृत्व को जानकारी दे दी गई है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा कई विधायक टिकट कटने की स्थिति में पार्टी को बाय-बाय भी कर सकते हैं। कई विधायक तो अभी से दूसरी पार्टी जैसे सपा और बसपा के संपर्क में है। पश्चिम से भाजपा के एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें ऐसा इशारा मिला है कि शायद इस बार उन्हें टिकट नहीं मिलेगा। वे कई बार विरोध में प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन तक करने बैठ गए। वह अपने क्षेत्र की जनता की आवाज बुलंद कर रहे थे, लेकिन कुछ नेताओं ने उन्हें विरोधी बताकर टिकट कटवाने की साजिश कर रहे हैं।
दरअसल संगठन ने माइक्रो लेवल पर सर्वे किया है। जिसमें कई विधायकों के काम काज संतुष्टï नहीं पाए गए। पार्टी को लगता है कि अगर इन्हें रिपीट किया गया तो नुकसान हो सकता है। पार्टी ने ऐसे करी सौ सीटों को ब्रैकेट में रखा गया। ब्रैकेट में रखने का तात्पर्य पहले चरण की सूची में इनका नाम नहीं होगा। इन सीटों पर अगर पार्टी को मौजूदा विधायकों से मजबूत प्रत्याशी मिल जाता है तो पार्टी दूसरे पर दांव खेलेगी। अगर मौजूदा विधायक से मजबूत प्रत्याशी नहीं मिलता है तो पार्टी फिर विधायक को ही टिकट दे सकती है। पार्टी का सारा जोर सत्ता विरोधी लहर को खत्म करना या फिर बहुत ही कम करना। पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि इसके लिए ऐसे विधायकों का टिकट काटना सबसे बेहतर उपाय होगा, जो जनता से कटे रहे या फिर सरकार और संगठन की फजीहत कराते रहे।
विधायकों का फीडबैक लेने के लिए एजेंसियों से सर्वे कराए जा रहे हैं। संघ से लेकर और कई संगठन विधायकों का पूरा रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहे हैं बल्कि उसका बारीकी से अवलोकन भी कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले दो महीने से विधानसभा वार सर्वे किया जा रहा है। भाजपा से जुड़े एक सूत्र का कहना है कि यह तय है कि इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में कई जीते हुए विधायकों को टिकट नहीं मिलेगा।
पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद तय किया गया कि पार्टी किसी भी विधायक को ज्यादा भाव नहीं देगी। पार्टी सिर्फ सरकार की उपलब्धियों और संगठन की क्षमता के आधार पर ही चुनाव में उतरेगी। किसी भी विधायक की शर्तें नहीं मानी जाएगी। अगर कोई विधायक सीट बदलना चाहता है तो उनकी इस मांग को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भाजपा नेतृत्व को इस बात का पता चल गया है कि कुछ विधायक दूसरे दलों के संपर्क में हैं। इन विधायकों का टिकट काटा जाना तय हो चुका है। सितंबर महीने के आखिरी सप्ताह में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अगुवाई में उत्तर प्रदेश के सह चनाव प्रभारी अनुराग ठाकुर समेत कई केंद्रीय मंत्रियों की टीम ने उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियों की समीक्षा की थी। इसी बैठक के दौरान यह तय हो गया था कि आने वाले विधानसभा चुनाव में जिन विधायकों का प्रदर्शन बेहतर नहीं है उनका टिकट काट दिया जाएगा।