सुब्रत भट्टाचार्य/शोभा भारती
युग करवट
गाजियाबाद। वरिष्ठ आईएएस डॉ. अजय शंकर पांडेय को झांसी कमिश्नर पद पर प्रमोशन हो गया है। डॉ. अजय शंकर पांडेय ने जिले में १५ जुलाई, २०१९ को बतौर डीएम के रूप में अपना कार्यभार संभाला था। जिस दौरान उन्होंने अपना कार्यभार संभाला था, उस समय सीएए, एनआरसी जैसे मुद्दों पर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था लेकिन अपनी कार्यकुशलता और अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय के चलते उन्होंने  स्थिति को बेहद अच्छे तरीके से संभाला। जिले में कहीं भी कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।
वरिष्ठ आईएएस डॉ. पांडेय के लिए यह जिला अंजान नहीं था। पहले भी वह यहां बतौर नगरायुक्त पद पर रहकर कार्य कर चुके थे, जिसकी वजह से वह जिले की स्थिति से परिचित थे। पूर्व कार्यकाल का अनुभव उनके डीएम रहते काम आया और पिछले दो साल में जिले में शांति व्यवस्था पूर्ण रूप से कायम रही।
उनके कार्यकाल के दौरान किसान आंदोलन हुआ और किसान यूपी गेट पर डटे रहे। हालांकि, यहां भी उनकी दूरदर्शिता और संवाद कायम रखने की शैली काम आई और जिले की सीमा के अंदर किसानों का कोई उग्र प्रदर्शन नहीं हो सका।
निर्वतमान डीएम डॉ. अजय शंकर पांडेय जहां आमजन से सीधा संवाद करते हैं, वहीं विभागों में व्याप्त भ्रष्टïाचार को समाप्त करने के लिए उन्होंने पहल करते हुए जिला मुख्यालय परिसर में शिकायत पेटिका रखवाई जिसमें गुप्त शिकायतों के आधार पर भ्रष्टï अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। इतना ही नहीं वरिष्ठ आईएएस हमेशा अपनी नई पहल और प्रयास के लिए जाने जाते हैं। चाहे वह ‘ऑलवेज़ विद् यूÓ योजना हो या ‘ग्राम सद्भाव कार्यक्रमÓ हमेशा उन्होंने  इस तरह के प्रयास किए हैं जिससे आमजन को राहत मिल सके। खुद निर्वतमान डीएम अजय शंकर पांडेय ने आमजन की शिकायत पर तत्काल प्रभाव से मौके पर पहुंचकर कार्रवाई भी की ताकि जनता को भरोसा हो सके और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना।
चाहे खुद प्राइवेट कार से जाम के हालातों को जानना हो या फिर भरी सर्दियों में देर रात शेल्टर होम जाकर वहां लोगों से हकीकत जानना, निवर्तमान डीएम एक ऐसा व्यक्तित्व रहे हैं जिनसे आमजन आसानी से अपनी बातों को खुलकर रखा। कोरोना संक्रमण के दौरान खुद संक्रमित होने के बाद भी वह हमेशा लोगों की मद्द के लिए तत्पर रहे। जिले में अपने कार्यकाल को लेकर युग करवट से हुई विशेष बातचीत में डॉ. अजय शंकर पांडेय ने कहा कि गाजियाबाद जिला चुनौतियों से भरा हुआ है लेकिन इन चुनौतियों से निबटना ही एक अधिकारी के लिए चैलेंज होता है।
2 जिले में आप बतौर डीएम दो साल से कार्यरत रहे, कैसा अनुभव रहा आपका?
देखिए, जिला मेरे लिए अंजान नहीं था। लेकिन यहां बतौर डीएम आने के बाद जनता, परिचितों से जो प्यार सम्मान मिला, उसे बयां नहीं किया जा सकता। अधीनस्थ्य अधिकारियों ने हमेशा सहयोग दिया और और उनके समन्वय और शुभचिंतकों के सहयोग से दो साल का कार्यकाल बेहतर रहा। जिले में इस दौरान कभी कोई अराजक स्थिति नहीं बनी। हालांकि, इस दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं लेकिन अगर कभी तनाव का माहौल बना तो स्थानीय लोगों व अधिकारियों के सहयोग से ना सिर्फ उसे संभाला गया बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से उसे निबटा भी गया ताकि कोई अप्रिय घटना ना घट सके। कार्यकाल चुनौतीपूर्ण जरूर रहा लेकिन सभी से मिले सहयोग और प्यार से जिले में कार्य करने का बेहतर अनुभव रहा जो हमेशा याद रहेगा। पहले भी जिले में विभिन्न पदों पर तैनात रहा हूं, ऐसे में शुभचिंतकों की एक लंबी फेहरिस्त है जिन्होंने हमेशा सहयोग किया। जो प्यार यहां मिला, वह कभी भूलाया नहीं जा सकेगा। अपने कार्यकाल से संतुष्ट हूं। जो मैं बेहतर जिले के लिए कर सकता था, वो मैंने किया।
2 आपके कार्यकाल के दौरान कितनी चुनौतियां आईं?
जब मैंने जिले का कार्यभार संभाला उस दौरान सीएए, एनआरसी को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में दंगे चल रहे थे। क्योंकि जिला दिल्ली की सीमा से सटा हुआ था, जिले में भी स्थिति काफी तनावपूर्ण रही। इतना ही नहीं कई बार स्थिति को संभालने के लिए अधिकारियों ने अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किया और लोगों को इस तनावपूर्ण माहौल से बचाया। एक दो जगह माहौल बिगडऩे की आशंका बनी लेकिन सभी के सहयोग से उन स्थितियों को संभाला गया। इसके बाद फिर किसान आंदोलन शुरू हो गया और जिले की सीमा में किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया लेकिन यहां भी हमेशा किसान नेताओं से संवाद बनाए रखा। अधिकारियों की राउंड द क्लार्क ड्यूटी लगाई गई जिससे कभी किसानों ने कोई उग्र प्रदर्शन जिले की सीमा में नहीं किया तो वहीं किसानों ने भी कभी कोई शिकायत अधिकारियों से नहीं की। किसान आंदोलन को एक लंबा समय हो गया है लेकिन हालात  तनावपूर्ण कभी नहीं आए।
2 इन दो सालों में कोरोना संक्रमण ने भी जिले में कहर बरपाया?
कोरोना संक्रमण सिर्फ जिले में ही नहीं बल्कि पूरे देश में फैला। जिले में भी स्थिति खराब हुई बल्कि पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक रही। लेकिन लगातार संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए बैठक और केंद्र व प्रदेश सरकार की गाइडलाइन का पालन कराया गया। यहां तक कि गांवों में दूसरी लहर से निबटने के लिए सामुदायिक स्वैच्छिक कन्टेनमेंट योजना लागू की गई जिसका परिणाम यह हुआ कि जो स्थिति बिगड़ी, वह कंट्रोल में आनी शुरू हो गई। जिले में चैलेंज इसलिए भी अधिक था क्योंकि दिल्ली के निकट होने से हालात और बिगड़े लेकिन जहां सख्ती की जरूरत थी, वहां इसे लागू किया गया और लोगों को जागरूक किया गया। अस्पतालों में बेड बढ़ाए गए ताकि लोगों को इलाज मिल सके। ऑक्सीजन नगर निगम द्वारा वितरित की गई। इसके बाद हालात कंट्रोल में आने शुरू हो गए।
2 आप खुद भी संक्रमित हुए, लेकिन हमेशा लोगों की मदद करते रहे?
एक अधिकारी के तौर पर उसका पहला कर्तव्य जनता और समाज की सेवा करना होता है। कोविड संक्रमित होने के दौरान कुछ समय घर पर आइसोलेट रहा, फिर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। लेकिन संकट की इस घड़ी में लोग इस उम्मीद से फोन कर रहे थे कि उन्हें मद्द मिल सके और मैंने हर संभव प्रयास किए जिससे लोगों को मद्द मिल सके। कोरोना संकट ऐसा दौर था जब लोग अपनों के इलाज के लिए परेशान थे। ऐसे में लोगों की मद्द जितनी हो सकी, मैंने की। यह सिर्फ मेरा कर्तव्य ही नहीं बल्कि इंसानियत का फर्ज भी था।
2 गाजियाबाद जिले में तैनात अधिकारियों पर काफी दबाव रहता है। इसे किस प्रकार देखते हैं?
देखिए, गाजियाबाद जिला एक चैलेंजिग जिला है जहां चुनौतियां बहुत हैं, काम बहुत है। बड़ा जिला होने के कारण हमेशा लोगों को उम्मीद रहती है कि जो भी अधिकारी यहां तैनात रहे, वह उनकी सुनें। कार्य के दबाव के अलावा भी अन्य काफी दबाव रहते हैं। यह औद्योगिक सिटी मानी जाती है। लेबर, किसान, राजनीति से लेकर अन्य कई दबाव होते हैं लेकिन इस चुनौतीपूर्ण माहौल में काम करना ना सिर्फ एक अधिकारी की साख को कायम रखता है बल्कि उसकी कार्यकुशलता को बयान करता है। यह करने में भी काफी हद तक सफल हुआ हूं। कई चुनौतियां आईं, दबाव रहा लेकिन हमेशा आमजन के हित में कार्य किया। हर अधिकारी को इन्हीं दबाव के साथ काम करना होता है और यही उसका चैलेंज भी होता है।
2 अपने कार्यकाल के दौरान आपने जिले में कई नई पहल कीं?
देखिए, दिल में अगर कोई काम करने की इच्छा हो तो उसे पूरा किया जा सकता है। एक अधिकारी अपने पद पर रहते हुए भी समाज के लिए काफी कुछ कर सकता है, इसके लिए उसमें इच्छाशक्ति का होना जरूरी है। फिर कोई काम मुश्किल नहीं है। मैंने भी यही किया। बतौर डीएम कार्यकाल मेरी जिम्मेदारी थी कि मैं लोगों की मद्द के लिए कुछ कर पाऊं। बस यही मैंने किया। कोरोना के दौर में कई बच्चों ने अपने पिता को खोया तो कई पत्नियों ने अपने पति खोए। इस संकट के दौर में परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगे। एक बच्चे ने अपने पिता के निधन के बाद मुझसे फोन कर मद्द मांगी। तो मुझे अहसास हुआ कि यह एक परिवार की परेशानी नहीं है बल्कि उन सभी परिवारों की परेशानी हैं जिन्होंने अपने परिवार के मुखिया को खोया है। बस यहीं से एक संकल्प लिया और ‘ऑलवेज़ विद् यूÓ अभियान शुरू किया। इस दौरान ऐसे परिवारों की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने का कार्य किया जा रहा है। अब तक करीब ८० परिवारों की शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। जिला ही नहीं बल्कि अन्य जिलों के पीडि़तों को भी वारिसान जैसे प्रमाणपत्र तत्काल दिलवाए गए।
2 आपने अभी ग्राम सद्भाव योजना शुरू की है, इसका क्या मकसद है?
गांवों में चुनाव के बाद अक्सर विजेता और उपविजेता प्रत्याशियों के बीच रंजिश का माहौल उत्पन्न हो जाता है। इसकी वजह से आए दिन गांवों में रंजिशन तनाव का माहौल बना रहता है व लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं। इसका सीधा असर गांवों की विकास योजनाओं पर पड़ता है। गांवों में रंजिश का माहौल समाप्त कर सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए ग्राम सद्भाव योजना शुरू की गई है जिसमें विजेता ग्राम प्रधान और उपविजेता को गांव के विकास के लिए जोड़ा गया है ताकि दोनों मिलकर गांव के विकास के बारे में सोचें। इस पहल का स्वागत खुद गांववासियों ने किया है। इस योजना का असर यह है कि गांवों में स्थिति तनावपूर्ण नहीं हो सकी।
2 आपने कई शिकायतों का खुद अपने स्तर से निरीक्षण किया है, ऐसा क्यों?
जनता दरबार के दौरान ऐसी कई शिकायत मैंने सुनी जब शिकायतकर्ता विभागीय अधिकारियों पर सुनवाई ना करने के आरोप लगा रहे थे और परेशानियों को काफी बड़े स्तर पर बता रहे थे। शिकायतों की सच्चाई जानने के लिए एक बार मैं खुद ही निजी कार से मौके पर शिकायतकर्ता को लेकर पहुंच गया, लेकिन वह शिकायत सही नहीं निकली तो शिकायतकर्ता ने फिर इसके लिए माफी मांगी। एक समाजसेवी ने सर्दियों केेदिनों में शेल्टर होम की बदहाली को लेकर शिकायत की, तो मैंने खुद आधी रात जाकर एक शेल्टर होम में कई घंटे बिताए और सरकारी कामकाज किया। लेकिन मौके पर शिकायत करने वाले समाजसेवी नहीं पहुंचे। हालांकि, इस निरीक्षण से एक फायदा जरूर हुआ कि मुझे फिर किसी शेल्टर होम का निरीक्षण करने की आवश्यकता नहीं पड़ी और जो बदहाल चल रहे थे, वह सब दुरूस्त हो गए। मकसद यही था कि किसी अन्य अधिकारी को भेजने के बजाए खुद से उसकी वस्तुस्थिति जानी जाए, इससे लोगों में अधिकारियों के प्रति भरोसा बढ़ता है और सही स्थिति का भी पता चल जाता है।
2 आप हमेशा धीर-गंभीर बने रहते हैं, बेहद कम मौके पर ही आप मुस्कुराते नजर आते हैं
देखिए, डीएम का पद एक बड़ा जिम्मेदारी भरा पद होता है। आम जनता इस मकसद से आपके पास आती है कि उनकी बातों को ध्यान से सुना जाए और कार्रवाई हो। ऐसे में अगर आप आवेदक से हंस कर बातें करते हैं तो उसके मन में एक धारणा बन जाती है कि उसकी बातों को ध्यान से नहीं सुना जा रहा है जिससे उसके मन में भी खटास उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में जरूरी है कि लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए ताकि सामने वाला व्यक्ति भी आपको जिम्मेदार समझे और संतुष्टï हो।
2 आपके कार्यकाल में कई चुनौतिया आई, लेकिन आप हमेशा विवादों से दूर रहे?
देखिए, नीयत साफ हो तो विवादों से दूर रहा जा सकता है। एक अधिकारी के तौर पर हमारी जिम्मेदारी समाज और जनता के प्रति होती है। जिसे निभाने में कभी पीछे नहीं रहा। हर चुनौती का सामना किया। लेकिन कभी ऐसी स्थिति नहीं आई जिससे कोई विवाद उत्पन्न हो। सीधी से बात है कि अगर आप अच्छे अधिकारी की तलाश में रहेंगे तो कभी कोई काम नहीं करा पाएंगे। ऐसे में जो उपलब्ध हो उससे काम चलाया जाए तो कार्य भी समय पर और सही तरीके से होते हैं। यही वजह है कि मैने आपने कार्यकाल में कभी किसी अधीनस्थ अधिकारी के प्रति दुव्र्यवहार की भावना से काम नहीं करने दिया नाहीं कोई ऐसी रिपोर्ट तैयार की जिसका असर यह हुआ है कि अपने अधीनस्थों ने भी हर मौके पर मेरा सहयोग दिया जिससे जिले में बेहतर कार्यकाल निभा सका और हर चुनौती से निबट सका। आप अगर किसी के प्रति गलत भावना से कार्य नहीं करेंगे जो हमेशा विवादों से दूर रहेंगे। यही मैंने भी अपने जीवन में अपनाया है।
2 आप डीएम से पूर्व जिले में कई पदों पर रहे, क्या बदलाव आपको देखने को मिले?
मैने इस जिले में सीडीओ, नगरायुक्त के पद पर भी काम किया और पिछले दो साल से जिले में बतौर डीएम के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इन सालों में जिले में काफी विकास के काम हुआ। जिले की स्थिति बदली। सिविल टर्मिनल, मेट्रो लाइन, एलीवेटेट रोड, हाइवे, कई एक्सप्रेस वे बने यह सब जिले के विकास के लिए बेहतर बदलाव है। कैलाश मानसरोवर जैसी बडी इमारत बनी। जिला हर दिन विकास के पथ पर अग्रसर है।