नोएडा (युगकरवट)। कोरोना महामारी के समय में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बनाई गई एक हाई पावर कमेटी के निर्णय के अनुसार जेल मैं बंद कैदियों को पैरोल पर रिहा किया जा रहा है। उन कैदियों को पैरोल दिया जा रहा है जो 7 साल या 7 साल से कम की धारा में जेल के अंदर निरुद्ध हैं। जिन कैदियों को 7 साल या उससे कम की सजा कोर्ट द्वारा दी गई हैं उन्हे भी इसका फायदा मिल रहा है। इसके तहत अब तक 69 बंदियों को जेल से रिहा किया गया है।
गौतम बुद्ध नगर स्थित लुक्सर जेल के सुपरिटेंडेंट बी एस मुकुंद ने बताया कि कोविड-19 के समय में सुप्रीम कोर्ट ने एक हाई पावर कमेटी गठित की है, जिसने यह निर्णय लिया है कि कोविड-19 के संक्रमण काल में 7 वर्ष या 7 वर्ष से कम सजा की धारा में न्यायालय में बंद कैदियों को 2 माह के लिए पैरोल पर छोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि जिन कैदियों की 7 वर्ष या 7 वर्ष से कम की कोर्ट द्वारा सजा हुई है, वे भी 2 माह के लिए पैरोल पर छोड़े जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए कैदियों को एक आवेदन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में देना होता है। वहां पर वर्चुअल सुनवाई के दौरान न्यायालय यह तय करती है, कि किन-किन कैदियों को छोडऩा है। और किनको नहीं। उन्होंने बताया कि कोर्ट से छोडऩे का आदेश आने के बाद जेल से कैदियों को रिहा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आज तक 69 बंदियों को पैरोल पर रिहा किया गया है।
जेल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि लुक्सर जेल में 2,800 कैदी निरुद्ध है। सभी कैदियों को सूचित कर दिया गया है, कि सुप्रीम कोर्ट के हाई पावर कमेटी के निर्णय के अनुसार अगर वे 7 वर्ष से कम की सजा के आरोपी हैं, तो अपने पैरोल के लिए एप्लीकेशन दे दें, ताकि उसे न्यायालय भेजा जाए तथा न्यायालय के निर्णय के बाद उन्हें 2 माह की अंतरिम जमानत पर जेल से छोड़ दिया जाए। उन्होंने बताया कि आज 50 कैदियों ने आवेदन दिया है। जिसकी सुनवाई कोर्ट में वर्चुअल रूप से हो रही है। कोर्ट जितने लोगों को छोडऩे का आदेश करेगा, शाम तक उतने लोगों को छोड़ दिया जाएगा। जेल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि लुक्सर जेल में बंद 23 कैदी कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे। वहीं गाजियाबाद की डासना जेल से भी कैदियों को रिहा किया गया। डासना जेल से 540 कैदियों को छोड़ा गया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को उन कैदियों को रिहा करने पर विचार करने को कहा जो कोरोना से संक्रमित हैं।