युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। पॉर्टल पर अटके नक्शों को लेकर अब प्रदेश का नियोजन विभाग और सख्त हो गया है। अगर कोई नक्शा पास नहीं होता है या उसके रजिस्ट्रेशन को जीडीए रद्द करता है तो उसका कारण पॉर्टल पर बताना होगा। इससे जीडीए के अधिकारियों के खेल का चेप्टर क्लॉज होने की संभावना बढ़ गई है। अभी तक पॉर्टल पर जो भी नक्शे आते थे उनका निस्तारण करने के लिए जीडीए के पास कई दिनों का समय होता है। कई बार वह पॉर्टल पर रजिस्टर्ड नक्शे को रद्द कर देता था। इसकी डिटेल अधिक नहीं बताई जाती थी। कई बार तो पॉर्टल पर केवल इतना ही लिख दिया जाता था कि नक्शा नियम के मुताबिक नहीं है। कई कैंसल किए जाने वाले नक्शे के पॉर्टल पर जीडीए लिख देता था कि मानक के हिसाब से नक्शा नहीं है। इसी के चलते जीडीए एक महीने में कई सौ नक्शों को पेंडिंग दिखा देता है। हाल ही में प्रदेश सरकार तक मामला पहुंचा। शासन ने पाया कि पॉर्टल पर नक्शे अपलोड करने और नक्शे के निस्तारण की प्रक्रिया त्रटिपूर्ण पाई गई है। इसी को लेकर शासन ने दुबारा से जीडीए के सभी आर्किटेक्ट और नियोजन विभाग के कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी है।