युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग ने खराब पानी की शिकायत पर नंदग्राम क्षेत्र में चल रहे वॉटर प्लांटों के पानी की जांच का अभियान चलाया था। अब इस जांच में हैरानी भरा खुलासा हुआ है कि विभाग को इसकी जानकारी तक नहीं मिल सकी कि वॉटर प्लांट किस कम्पनी के या व्यक्ति के नाम हैं। अब विभाग उन भू-स्वामियों को नोटिस जारी कर रहा है, जिनकी जमीन पर यह प्लांट चलाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत मिलने पर नदंग्राम में चल रहे चार वॉटर प्लांट से पानी के नमूने लिए थे। जिसमें जांच के बाद एक के पानी का सैंपल फेल पाया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी तक इन वॉटर प्लांट के मलिकों को नोटिस नहीं दे सका है। जांच के दौरान भी मौके पर प्लांट चलाने वाली कम्पनी या उनके मालिकों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी। इसकी वजह से विभागीय टीम उन्हे कोई नोटिस दिए ही वापस लौट गई थी। हैरानी की बात यह है कि नंदग्राम क्षेत्र में ही दो दर्जन से अधिक वॉटर प्लांट चल रहे हैं, लेकिन प्लांट की गुणवत्ता से लेकर उसके मानकों की जांच कौन कर रहा है या किसने एनओसी दी है, कौन सी कम्पनी के द्वारा प्लांट संचालित किए जा रहे हैं इस बारे में कोई जानकारी तक विभाग को उपलब्ध नहीं हो सकी। जबकि जिले में ऐसे सैंकड़ों की संख्या में वॉटर प्लांट चल रहे हैं। डीएसओ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि वॉटर प्लांट के मलिकों की कोई जानकारी न मिलने की वजह से उन मकान मलिकों को नोटिस जारी किए गए हैं, जहां ये चलाए जा रहे हैं। अगर नोटिस का जवाब नहीं मिला तो प्लांट को बंद कराए जाने की कार्रवाई की जाएगी। डीएसओ ने बताया कि शहर में संचालित हो रहे वॉटर प्लांट की जांच की जाएगी, जिससे पता चल सके किकितने वॉटर प्लांट बिना एनओसी के चल रहे हैं।