युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। एक होनहार बेटे ने अपने पिता के सपने को पूरा करते हुए एक ऐसे कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें सभी समाज के लोगों ने शिरकत की। जी हां, विभु बंसल ने अपने पिता की पहली पुण्यतिथि पर उनके काव्य संग्रह के विमोचन का कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें मौजूद सभी लोगों ने स्व. सुरेश चंद्र बंसल को याद किया। जितने भी लोग कार्यक्रम में थे वो सभी परिवार के सदस्यों के रूप में शामिल हुए। दरअसल स्व. सुरेश चन्द्र बंसल एवं दादी ने विभु बंसल को जो संस्कार दिये हैं उसी का असर था कि कार्यक्रम में आने वाला हर व्यक्ति अपने आप को परिवार का सदस्य समझ रहा था।
भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय सह संयोजक विभु बंसल के पिता स्व. सुरेश चंद्र बंसल की प्रथम पुण्य तिथि पर उनके काव्य संग्रह ‘इंद्रधनुषÓ का विमोचन किया गया। कवि नगर के लायंस क्लब ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में आयोजित कवि सम्मेलन में श्रोता देर रात तक काव्य रसधारा का आनंद लेते रहे। स्व. सुरेशचंद्र बंसल की तीनों पुत्रियों प्रीति, आरुषि व आयुषी व पुत्रवधु शिल्पी ने उनका लिखा एक गीत गाकर सब की आंखें नम कर दीं। प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग, मेयर आशा शर्मा, सांसद अनिल अग्रवाल, एमएलसी दिनेश गोयल, दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बलदेव राज शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता पृथ्वी सिंह कसाना, पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी, महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा आदि ने संयुक्त रूप से स्व. सुरेश चंद्र बंसल के काव्य संग्रह का विमोचन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कवियित्री रूचि अग्रवाल ने सरस्वती वंदना के साथ किया। इसके बाद कवियों ने अपनी रचनाओं की ऐसे गंगा बहाई कि श्रोता देर रात तक कविताओं में डूबे रहे। कवियों में विजेंद्र सिंह परवाज, विनीत चौहान, डॉ. प्रवीण शुक्ल, दिनेश रघुवंशी, राज कौशिक, वागीश दिनकर, डॉ. रुचि चतुर्वेदी, पीयूष कांति और सतीश वर्धन ने अपनी रचनाएं पेश की। कवि पीयूष कांति ने अपनी कविता प्रस्तुत की। उन्होंने विभु बंसल को ढांढस बंधाते हुए पढ़ा ‘पिता कभी मरत नहीं पा जात विस्तार मुस्काते सदा बन के संतन के संस्कार’ तो माहौल भावुक हो गया। कवि सतीश वर्धन ने कविता ‘मां भी महान है पिता भी महान है चरणों में दोनो के सारा जहान है’ सुनाई। कवियित्रि डॉ. रूचि चतुर्वेदी ने भी अपनी मशहूर कविता ‘मैं बिंदु से रेखा बनाने चली हूं, मै सागर से नदिया मिलाने चली हूं सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। कवि दिनेश रघुवंशी ने ‘गृहस्थी चलाना बहुत कठिन है बाबा कहते थे, हम को दृढ़ आधार दिलाने खुद ही टहते थे बाबा कहते थे’ सुनाकर लोगों को पितृस्नेह का अहसास कराया। वरिष्ठ पत्रकार और कवि राज कौशिक ने ‘माना जिस्म पर मेरे अब सर नहीं रहा, लेकिन यह भी सच है कि मरने का भी डर नही रहा’ से समां बांधा। देश-विदेश में अपनी कविताओं का जादू बिखेरने वाले प्रख्यात कवि प्रवीण शुक्ल ने भी ‘प्यारे कान्हा न धरती पे आना जमाना अब बदला हुआ’ सुनाकर श्रोताओं को वर्तमान युग से अवगत कराया। वीर रस के कवि विनीत चौहान ने देशप्रेम से परिपूर्ण कविता ‘ये धरती रण में दुश्मनों का कोई एहसान नहीं रखती’ सुनाई। अंत में मशहूर कवि विजेन्द्र सिंह परवाज ने ‘ताक-ताक कर आंखो पर हर कंकर मारी है, हमदर्दों ने यूं हीं मेरी नजर उतारी है सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष विभु बंसल अपने पिता के संघर्ष के दिनों की यादें लोगों के साथ साझा कर उनके काव्य संग्रह इन्द्रधनुष के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम में महामंत्री पप्पू पहलवान, दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री अशोक गोयल, मुरादनगर के विधायक अजीतपाल त्यागी और करनी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू, राष्ट्रीय अध्यक्ष व्यापार शक्ति संदीप सिंघल के अलावा संदीप गोयल, सौरभ कंसल, राकेश मोहन गुप्ता, आशुतोष गुप्ता, अंकुर अग्रवाल, सतीश चंद मित्तल, गौरव गर्ग, सचिन कोहली, अनिल सांवरिया, पुनीत गुप्ता एवम सभी परिजन एवं सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। विभु बंसल ने सभी का आभार व्यक्त किया।