सुब्रत भट्टाचार्य
गाजियाबाद। इसे उप्र प्रदेश के आसन्न विधानसभा चुनाव कहिए या फिर मसले को जल्द निपटारे के लिए बढ़ता दबाव का असर कहिए, केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि एमएसपी पर जल्द ही बड़ा फैसला करने जा रही है। सूत्रों का कहना है कि सरकार एमएसपी को कानूनी दर्जा देने पर विचार कर रही है। इसके लिए कृषि विशेषज्ञों से बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया है। संभावना है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के कुछ दिनों पहले सरकार इस संबंध में बड़ा ऐलान कर सकती है। बता दें कि दिल्ली बॉडर्र पर कृषि सुधार कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों की एक बड़ी मांग एमएसपी को कानूनी दर्जा देने की रही है। भारतीय किसान यूनियन के राष्टï्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार अगर एमएसपी को कानून का दर्जा दे देती है तो किसान आंदोलन खत्म करने पर विचार कर सकती है। बता दें कि युग करवट ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था कि चुनाव से पहले किसान और कृषि को लेकर सरकार और भी कई बड़े फैसले ले सकती है।
फरवरी, 2022 से लेकर साल के अंत तक कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। इनमें उत्तर प्रदेश और पंजाब भी शामिल है, जहां किसान और कृषि एक प्रमुख चुनावी मुद्दा है।। इन दो राज्यों के अलावा उत्तराखंड, गुजरात और हिमाचल में भी अगले एक से डेढ़ साल के भीतर चुनाव होने है।
केंद्र सरकार और भाजपा को कृषि सुधार कानूनों को लेकर उत्तर प्रदेश और पंजाब में किसानों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। इसका फायदा विपक्षी दलों को मिल सकता है। हाल ही में मुजफ्फरनगर में आयोजित किसान महापंचायत में जुटी भीड़ से भाजपा के कान खड़े हो गए हैं।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा के लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में मिले मत प्रतिशत को बरकरार रखना एक चुनौती है। 2019 में भाजपा को किसानों का लगभग 91 फीसदी वोट भाजपा के पक्ष में आए थे। दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलित किसानों के धरने-प्रदर्शन को करीब 10 माह बीत चुके हैं। केंद्र और भाजपा का भी मानना है कि अगर एमएसपी को कानूनी दर्जा देने की घोषणा कर दी जाती है और उसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया जाता है, तो कमोबेश आंदोलन शांत हो सकता है।
हालांकि क्या एमएसपी को कानून का दर्जा देने से सभी किसान संगठन मान जाएंगे, इस पर अभी भी संशय बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के किसान एमएसपी को कानून का दर्जा देने की मांग पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि यूपी और पंजाब के किसानों की समस्या व मांग अलग-अलग तरह की है। पंजाब के किसान मंडियों को बनाए रखने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं तो यूपी के किसान एमएसपी को कानून का दर्जा दिलाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। दरअसल, एमएसपी को कानून का दर्जा मिलने पर पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसानों को गन्ने का अच्छा मूल्य मिल सकता है। यहीं कारण है कि यहां के किसान एमएसपी को कानून का दर्जा दिलाने को अपनी पहली मांग बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश के चुनाव के देखते हुए सरकार इस पर कोई फैसला कर सकत है।
वहीं, सूत्रों के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय ने तीन विशेषज्ञों की जो समिति बनाई थी और उसने जितने भी किसान संगठनों या निजी तौर पर किसानों से बातचीत की थी, उनमें 100 फीसदी का यह आग्रह था कि सरकार एमएसपी को कानूनी दर्जा दे। हालांकि उनकी राय को अधिकृत तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरएसएस के सहयोगी संगठन-भारतीय किसान संघ ने भी एमएसपी पर कानून बनाने की वकालत की ह। इसके बाद ही सरकार का रवैया नरम पडऩे लगा। भारतीय किसान संघ ने 500 से अधिक जिलों में धरने-प्रदर्शन किया है। उनकी बुनियादी मांगें हैं कि सरकार फसलों के लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी करे और सरकारी खरीद का दायरा भी बढ़ाए। हालांकि सरकार की दलील है कि एमएसपी सेे बड़े किसानों को लाभ नहीं मिलता है। छोटी जोत के किसानों को एमएसपी से लाभ नहीं मिलता है।