रोहित शर्मा
गाजियाबाद। आज के दौर में राजनीति का भगवान भरोसे चलना कोई नया चलन नहीं है। भगवान का नाम लेकर खादीधारी अपने नफा-नुकसान को साधते हैं। चुनाव में जीत दर्ज के लिए भगवान के नाम को भी भुनाने का चलन है। हां, ऐसे लोग राजनीति में कलंक के समान हैं, जो नाम तो हनुमान जी का लेते हैं लेकिन राम के नाम पर छल कपट करना उनकी फितरत में शामिल रहा है। बात यहां एक नेताजी की हो रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान नेताजी ने पवन पुत्र हनुमान का दामन इस उम्मीद में थामा था कि शायद वे उनका बेड़ा पार लगा देंगे। कहावत है कि भगवान के घर में देर है अंधेर नहीं, बजरंग बली ने भी नेताजी को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और इनकी जमानत जप्त हो गई। दरअसल, भगवान राम के भक्त हनुमान का नाम लेकर वोट बटोरने का प्रयास करने वाले नेताजी पूर्व में भगवान राम के नाम पर छल करने में पीछे नहीं हटे थे। रामलीला कमेटी में इनका छल कपट लोग आज तक भुला नहीं पाए हैं।
विधानसभा चुनाव के दौर में एक राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे नेताजी ने हनुमान जी को भुनाने का जमकर प्रयास किया था। उन्होंने खुले मंच से दावा किया था कि घंटाघर रामलीला मैदान में उनके विरोधी राजनीतिक दल वालों ने भगवान हनुमान की प्रतिमा नहीं लगने दी। सिर्फ उनमें ही भगवान हनुमान की प्रतिमा रामलीला मैदान में लगवाने का दम है। जितने के बाद वे इस पावन कार्य को अंजाम देकर रामभक्त हनुमान की प्रतिमा लगवाकर इस कार्य को पूरा करेंगे। खैर, ना तो नेताजी चुनाव जीते और ना ही भगवान हनुमान की प्रतिमा रामलीला मैदान में लगी। अब जरा विधानसभा चुनाव से पूर्व चंद साल पीछे मुडक़र देखते हैं। रामलीला कमेटी के अंतिम चुनाव सन् 2018 में 14 सितंबर को हुए थे। इससे पूर्व कमेटी में बड़ा घपला सामने आया था। कमेटी के चुनाव के लिए 110 मेंबर बनवा लिए गए थे। सूत्रों के अनुसार इसमें 100 मेंबर 11 हजार रुपये के बनवाए गए थे, जबकि 10 मेंबर्स से 51 हजार रुपये वसूले गए थे। रामलीला कमेटी के चुनाव से ठीक पहले मेंबर बनवाने का यह घपला प्रकाश में आया था। मामले की जड़ तक पहुंचा गया तो पता चला कि मेंबर उन्हीं नेताजी के इशाने पर बनवाए गए थे, जो वर्तमान विधानसभा चुनाव में हनुमान जी की प्रतिमा रामलीला ग्राउंड में लगवाने का दम भर रहे थे। बताया जाता है कि रामलीला कमेटी के अंतिम चुनाव से पूर्व फर्जी मेंबर बनवाने का यह घपला सन् 2017 में हुआ था। उस दौरान नेताजी भी रामलीला कमेटी में बड़े ओहदेदार थे। खैर, रामलीला कमेटी के कुछ जिम्मेदार पदाधिकारियों ने उस दौरान इस घपले पर संज्ञान लिया और फर्जी तरीके से बनवाए गए सभी मेंबर्स को मेरठ सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से कैंसल कराया। तब कहीं जाकर उस दौरान रामलीला कमेटी के चुनाव संपन्न हो सके थे।
रामलीला कमेटी में पूर्व में रहे पदाधिकारियों से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला नेताजी द्वारा फर्जी मेंबर बनवाने तक ही सीमित नहीं था। उस दौरान एक ठेकेदार से भी पांच लाख रुपये की रकम भी ठेका दिलवाने के नाम पर भी वसूली गई थी। साफ है कि चंदाखोर नेताजी से भगवान को बचने में भी उस समय पापड़ बेलने पड़ गए थे। वर्तमान में एक बार फिर नेताजी ने विधानसभा चुनाव के दौरान हनुमान जी का बीड़ा अपने कंधे पर उठा लिया था। फर्जीवाड़े में माहिर नेताजी को आखिरकार जनता ने सबक सिखाया और उनकी औकात बता दी। शायद, कहीं जीत गए होते तो पहले रामलीला को ठग चुके नेताजी, इस बार हनुमान जी का नंबर लगाने में पीछे नहीं हटते।