युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए कम पड़ रही ऑक्सीजन को देखते हुए कई संगठनों ने अस्पतालों व जिला प्रशासन को ऑक्सीजन कंसंटे्रटर प्रदान किए थे ताकि मरीजों को इनसे लाभ मिल सके। कोविड संक्रमित मरीज ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे थे। हालात बद से बदतर होने के साथ ही कोविड अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की सप्लाई पर्याप्त नहीं हो पा रही थी। उस पर होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को भी ऑक्सीजन की किल्लत का सामना करना पड़ रहा था।
ऐसे में लोगों का जीवन बचाने के लिए संगठनों ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दान दिए थे। लेकिन अब यह ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जगह-जगह विभागों में पड़े धूल फांक रहे हैं। हाल ही में बैंकों द्वारा जिला प्रशासन को नौ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर प्रदान किए गए थे। अब तक इन कंसंटे्रटर को अस्पतालों या जहां आवश्यक हो, वहां नहीं भेजा गया है। इतना ही नहीं, जिला संयुक्त अस्पताल में भी बड़ी संख्या में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर धूल फांक रहे हैं जबकि इस अस्पताल को एल-२ श्रेणी का बनाया गया है और यहां निरंतर मरीज भर्ती हो रहे हैं। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि करीब २० की संख्या में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उन्हें मिले थे। लेकिन उनकी क्षमता पांच लीटर ऑक्सीजन की है जबकि उनके यहां भर्ती होने वाले मरीजों को इससे कहीं अधिक मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ रही है। ऐस में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के लिए आइसोलेशन वाले मरीजों को ही इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास भी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की खेप मौजूद है जो इस्तेमाल ही नहीं हो पा ही है। विभागीय अधिकारी अब इसको लेकर कोई निर्णय नहीं कर पा रहे हैं कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का इस्तेाल किस प्रकार से किया जाए। लेकिन अगर यह कंसंट्रेटर इस तरह से ही धूल फांकते रहे तो यह किसी काम के नहीं रह जाएंगे और जब इनके इस्तेमाल करने का नंबर आएगा, यह खराब हो चुके होंगे।