लोकसभा चुनाव २०२४ को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश भाजपा हाईकमान की तरफ से संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन शुरू हो गया है। लेकिन जो वीआईपी सीट हैं जिसमें गाजियाबाद शामिल है, उसको फाइनल करने का अधिकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर छोड़ दिया गया है। भाजपा सूत्रों के अनुसार गाजियाबाद सहित छह ऐसी सीटें हैं। हालांकि छह के अलावा तीन और सीटें हैं जिन पर पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह फैसला लेंगे। गाजियाबाद सीट को लेकर जो एक गुट शुरू से ही अपना अलग राग अलाप रहा है वो बहुत खुश नजर आ रहा है। लेकिन भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने युग करवट से बातचीत में कहा कि बड़ी सीट का फैसला बड़े लोग ही करते हैं। इसलिए भले ही एक गुट को ये लग रहा हो कि गाजियाबाद का टिकट किसी अन्य को मिल रहा है और इसलिए वो अंदरखाने खुश हो रहे हों, ऐसा नहीं है। गाजियाबाद सीट हमेशा वीआईपी रही है। २००९ में इस सीट से देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह चुनाव लड़े थे। उसके बाद २०१४ और २०१९ लगातार वर्तमान सांसद वीके सिंह जीत का परचम लहरा रहे हैं। इसलिए इस सीट का फैसला शीर्ष नेतृत्व ही करता आया है। तीसरी आंख ने देखा कि कभी अरुण सिंह, कभी कंगना रनौत और कभी कुमार विश्वास तो कभी डॉ. महेश शर्मा न जाने किस-किस का नाम लोग खुद ही चला रहे हैं। जबकि हकीकत यही है कि इस सीट पर पार्टी एक बार फिर वीके सिंह पर ही भरोसा कर रही है। बेदाग, बेबाक, ईमानदार छवि के धनी वीके सिंह जैसा व्यक्तित्व पार्टी में सबसे अलग है, देश में उनकी एक अलग पहचान है, इसीलिए कहने वाले कुछ भी कहते रहे लेकिन जब लिस्ट फाइनल होगी तो जो लोग गुटबाजी कर रहे हैं उन्हें जरूर जोर का झटका धीरे से मिलेगा। दरअसल, वीके सिंह की जो छवि है वो जनता में भी सबसे अलग है। कभी भी उनके संसदीय क्षेत्र में किसी भी विकास कार्य में कहीं कोई भ्रष्टचार का मामला सामने नहीं आया। कभी वीके सिंह ने किसी भी ऐसे व्यक्ति की सिफारिश नहीं की जिसकी छवि खराब हो। वो हर दुख-सुख में भी लोगों के साथ दिखाई देते हैं। सेनाध्यक्ष रहने के कारण उनका मिजाज सबसे अलग रहता था लेकिन उसके बावजूद भी आज वो एक-एक कार्यकर्ता को नाम से जानते हैं और दोनों पारियों में जिस तरह उन्होंने विकास कार्य कराये जाहिर है हाईकमान उन्हीं पर भरोसा करेगी, ऐसी गाजियाबाद की जनता को उम्मीद है। जय हिंद