प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। निगम की बोर्ड बैठक में पहली बार नगर आयुक्त का जलवा देखने को मिला। बीजेपी के कई पार्षद अलग-अलग मुद्दों पर नगर आयुक्त को घेरने की कोशिश में लगे हुए थे। मगर जिस तरह से नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने बीजेपी के चक्रव्यूह को तोड़ा, वह नगर निगम के पार्षदों में ही चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, बीजेपी पार्षद राजेन्द्र त्यागी, पार्षद अनिल स्वामी और पार्षद हिमांशु मित्तल सहित कई पार्षद पूरी तैयारी के साथ सदन में आए थे।
बीजेपी के इन पार्षदों की तैयारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदन में पार्किंग को लेकर जिस तरह से सदन में सवाल उठाए गए, वह सभी तकनीकी थे। इन सवालों में नगर आयुक्त बार-बार घिरते नजर आ रहे थे। इनमें एक बड़ा सवाल यह था कि जब नगर निगम सदन में इंटीग्रेटेड पार्किंग का प्रस्ताव गिर गया, तो फिर उसे शासन के पास क्यों भेजा। इस प्रस्ताव शासन को भेजने के लिए मेयर की भी अनुमति नहीं ली गई। फिर इसके लिए बायलोज प्रकाशन के लिए भेजा उसे भी सदन में पेश नहीं किया। इसके अलावा भी सर्कल रेट के हिसाब से दुकानों का किराया बढ़ाने से लेकर तमाम तरह के कई मसलों पर नगर आयुक्त को घेरने की कोशिश की गई। सदन की बैठक से पहले बीजेपी के कई पार्षदों की बैठक हुई थी, जिसमें सदन के लिए खास रणनीति बनाई गई थी। मगर बीजेपी के कई पार्षदों की रणनीति में नगर आयुक्त की सेंध लगने की खबर है। नगर आयुक्त को बोर्ड बैठक होने से पहले ही पता चल गया था कि उनके खिलाफ सदन में चक्रव्यूह तैयार है। इससे निकलने के लिए उन्होंने खास रणनीति का प्रयोग कर बीजेपी के पार्षदों में ही सेंधमारी कर दी। उनकी रणनीति का ही असर था कि कई बीजेपी पार्षद उनके खिलाफ नहीं बोले, बल्कि कई तो उनके पक्ष में खुलकर खड़े हो गए। इसका असर यह हुआ कि एक भी प्रस्ताव पर नगर आयुक्त के खिलाफ वोटिंग नहीं हो सकी।