युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। स्वर्णजयंतीपुरम के 139 जिन प्लॉट के आवंटन का घोटाला हुआ उन पर कैसे निर्माण हो गया। मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह ने जीडीए से घोटाले से जुड़ी पत्रावली तलब की है। आज मंडलायुक्त को जीडीए में जांच के लिए आना था। मौसम खराब होने के कारण मंडलायुक्त दोपहर तक जीडीए नहीं आए। हो सकता है कि यह दौरा टल जाए। वैसे जीडीए में मंडलायुक्त का इंतजार होता रहा। मगर इस घोटाले में जीडीए के प्रवर्तन विभाग में तैनात रहे तत्कालीन कई इंजीनियर और अधिकारी निशाने पर आ गए है।
जीडीए की स्वर्णजयंतीपुरम कॉलोनी में प्लॉट के लिए जीडीए ने वर्ष 2007 तक कई प्लॉट की स्कीम को लॉन्च किया था। सबसे पहली स्कीम जीडीए ने 1997 में लॉन्च की थी। बाद में पैसा जमा नहीं करने के कारण जीडीए ने कई प्लॉट के आवंटन को कैंसल कर दिया। आरोप है कि बोर्ड बैठक में एक प्रस्ताव को पास कराया गया। जिसके आधार पर जीडीए ने पूर्व में कैंसल प्लॉट के आवंटन को बाहल कर दिया। घोटाले के उजागर होने के बाद से इस प्रकरण को लेकर शासन और हाईकोर्ट के आदेश पर जांच हुई। जांच मंडलायुक्त मुरादाबाद ने वर्ष 2019 में की। जिसमें तत्कालीन जीडीए वीसी डीपी सिंह, ओएसडी के पद पर तैनात रहे पीसीएस अधिकारी हीरा लाल और आरपी पांडेय सहित कई अधिकारी सहित 34 जीडीए के तत्कालीन अधिकारियों को आरोपी बनाया गया।
जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। इसके बाद भी प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। एक बार फिर से यह घोटाला सुर्खियों में आ गया है। इस बार जांच की कमान मंडलायुक्त मेरठ सुरेंद्र ंिसह ने अपने हाथ में ली है। आज जीडीए का दौरा करना था। मंडलायुक्त मौसम खराब होने के कारण समाचार लिखे जाने तक नहीं आए है। सूत्रों का दावा है कि इस घोटाले को लेकर वैसे तो कई तरह की जांच हो चुकी है। मंडलायुक्त इस प्रकरण की जांच करेंगे कि जिन 139 प्लॉट का गलत तरीके से पुरानी कीमत पर बहाल कर जीडीए को आर्थिक चोट पहुंचाई गई, उन पर निर्माण कैसे हो गया। मंडलायुक्त ने जीडीए से जांच कर उन अधिकारियों और कर्मचारियों तथा इंजीनियरों की एक सूची तैयार करने को कहा है जिनके कार्यकाल में 139 प्लॉट पर अवैध निर्माण हुआ था। संभावना है कि अब इस घोटाले में कई दर्जन और जीडीए कर्मचारियों, और इंजीनियरों का फंसना तय है।