गुर्जर व यादव बिरादरी के नेताओं को मिल सकती है तरजीह
-सुरेश चौधरी-
नोएडा (युगकरवट) उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पूर्व गौतमबुद्ध नगर जनपद में समाजवादी पार्टी द्वारा जिलाध्यक्ष बीर सिंह यादव को अचानक पद मुक्त किए जाने के बाद स्थानीय संगठन में और बड़े फेरबदल होने की चर्चा जोरों पर हैं। समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व यहां पर संगठन में बड़ा फेरबदल हो सकता है। बताया जाता है कि जिलाध्यक्ष के पद पर अबकी बार गुर्जर बिरादरी के नेता की ताजपोशी होगी। सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष फकीर चंद नागर से लेकर गुर्जर बिरादरी के कई प्रभावशाली नेता जिलाध्यक्ष बनने की दौड़ में हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गत दिनों संपन्न हुए पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली करारी हार का जिम्मेदार मानते हुए गौतमबुद्ध नगर के सपा जिलाध्यक्ष बीरसिंह यादव को हटा दिया है। उनको पद मुक्त किए जाने के पश्चात सपाइयों में चर्चा है कि आने वाले समय में संगठन में और बड़ा फेरबदल हो सकता है। गौतमबुद्ध नगर गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां जिलाध्यक्ष पद पर किसी गुर्जर नेता की ताजपोशी हो सकती है। वहीं यादव मतदाताओं को साधने के लिए किसी यादव नेता को नोएडा ग्रामीण का जिलाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा भी चल रही है। बता दें कि संगठन में अंदर खाने खासी रस्साकशी चल रही है। गुटबाजी की पराकाष्ठा इतनी है कि सपा नेता सोशल मीडिया पर एक दूसरे पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। चर्चा है कि जिलाध्यक्ष बीर सिंह यादव भी इसी गुटबाजी का शिकार बने हैं। कुछ सपाइयों का कहना है कि जिलाध्यक्ष बीर सिंह यादव ने हाल ही में समाजवादी पार्टी महानगर कमेटी से एक प्रतिष्ठित पद से हटाए गए नेता को अपनी कमेटी में जगह दे दी थी । समाजवादी पार्टी के सूत्र बताते हैं कि इस बात की शिकायत पार्टी आलाकमान से नोएडा के प्रभावशाली नेताओं ने की। इसके अलावा संगठन में व्यापक स्तर पर चल रही गुटबाजी की शिकायतें भी लगातार राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंच रही थी। सपाइयों का मानना है कि शह मात के इस खेल में आखिरकार जिलाध्यक्ष को मात खानी पड़ गई। इस मामले में सपाई खुलकर तो नही बोल रहे है, लेकिन अंदर खाने चर्चा है कि महानगर से हटाए गए पदाधिकारी को अपनी कमेटी में जगह देने की कीमत समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व सपा के जिलाध्यक्ष बीरसिंह यादव को अपना पद गंवा कर चुकानी पड़ी है।