मौजूदा सांसदों का टिकट होल्ड होना ही बड़ी बात
गाजियाबाद (युग करवट)। भारतीय जनता पार्टी ने १९५ उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने के बाद जिन मौजूदा सांसदों का टिकट होल्ड किया है उसमें कई बड़े नाम हैं। मौजूदा सांसदों का जो लोग विरोध कर रहे थे उनका ये कहना है कि टिकट होल्ड होना ही अपने आप में उनकी जीत है और जिनका टिकट होल्ड हुआ है हाईकमान में उनकी क्या हैसियत है इसका अहसास भी टिकट होल्ड ने करा दिया है।
उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर मौजूदा सांसदों को होल्ड पर रख दिया गया है। इसमें गाजियाबाद और मेरठ सबसे महत्वपूर्ण हैं। एक सूची जारी होने के बाद अभी तक दूसरी सूची जारी होने के लिए लगातार बैठकें चल रही है। कहीं ना कहीं भाजपा हाईकमान भी अब उम्मीदवारों के चयन को लेकर असमंजस में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गाजियाबाद सीट से जो एक मजबूत दावेदार टिकट मांग रहे थे अब उन्होंने परसों से मेरठ की ओर रूख कर लिया है। दरअसल मेरठ के मौजूदा सांसद राजेन्द्र अग्रवाल का टिकट भी खतरे में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने से पहले दिल्ली में जो बैठक हुई थी उसमें गाजियाबाद के नाम पर चर्चा हुई और बैठक में भाजपा के राष्टï्रीय महासचिव अरुण सिंह का नाम रखा गया। सूत्र बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अरुण सिंह के नाम पर अपनी असहमति जताई थी। उनका समर्थन मौजूदा सांसद वीके सिंह के साथ था जबकि सूत्र बताते हैं कि गृहमंत्री अमित शाह अरुण सिंह को गाजियाबाद से चुनाव लड़ाने के पक्ष में बताये जा रहे हैं। जब मुख्यमंत्री ने असहमति जता दी तो फिर गाजियाबाद को होल्ड कर दिया गया और अब दिल्ली और गाजियाबाद के चक्कर में गाजियाबाद अभी तक होल्ड है। हालांकि गाजियाबाद के कई जनप्रतिनिधियों ने लिखित रूप में जनरल वीके सिंह का विरोध किया है। ऐसी चर्चा है। स्थानीय सांसद जनरल वीके सिंह ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से भी कुछ दिन पहले मुलाकात की थी। मुलाकात कितनी सकारात्मक रही ये तो जानकारी नहीं मिली लेकिन ये भी उल्लेखनीय है कि अरुण सिंह राजनाथ सिंह के करीबी रिश्तेदार हैं। टिकट होल्ड होने के बाद जनरल वीके सिंह की सक्रियता गाजियाबाद में और बढ़ गई है, इस बात का अहसास होता है कि यदि उन्हें टिकट नहीं दिया जाता तो वो संभवत: इतनी सक्रियता नहीं दिखाते। हालांकि जनरल वीके सिंह ने विकास के मामले में जितनी मेहनत की है वो किसी छिपी नहीं है।
तमाम जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद भी उन्होंने गाजियाबाद के विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके अलावा एक बड़ा नाम होनेे के बाद भी जनरल वीके सिंह हमेशा गाजियाबाद के लोगों के बीच रहे और उनकी हर समस्या के समाधान का प्रयास किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीके सिंह की कई बार सराहना भी कर चुके हैं। अमेेरिकी राष्टï्रपति जोबाइडन की अगुवानी भी वीके सिंह ने ही की थी जो अपने आप में बड़ी बात थी। इतना ही नहीं जब उत्तराखंड में टनल में मजदूर फंसे थे तब पूरे ऑपरेशन की कमान वीके सिंह ने ही संभाली थी और जब प्रधानमंत्री बाहर निकले मजदूरों से मुखातिब हुए थे तो मजदूरों ने जनरल वीके सिंह की तारीफ की थी उस पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि वे कमांडर है और हमेशा हर काम को बड़ी मुस्तैदी के साथ करते हैं यही उनकी पहचान है। बहरहाल टिकट किसी को मिले लेकिन जनरल वीके सिंह का जो कद है उसे कोई कम नहीं कर सकता। गाजियाबाद का सौभाग्य है कि जनरल वीके सिंह जैसा व्यक्तित्व यहां का दो बार से प्रतिनिधत्व कर रहा है और उम्मीद है कि तीसरी बार भी भाजपा हाईकमान उन्हें ही प्रतिनिधित्व का मौका दे।