युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार ने अब मदरसों में राष्ट्रगान  को अनिवार्य कर दिया है। सरकार के इस फैसले का गुरुवार से अमल भी हो गया है। गाजियाबाद के मुस्लिम समाज के लोगों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। शहर काजी और नायब शहर काजी ने भी सरकार के इस फैसले के साथ रजामंदी जाहिर की।
शहर काजी मसरूर अब्बासी का कहना है कि राष्ट्रगान में कोई बुराई नहीं है। अलबत्ता आगे चलकर कोई और गान न थोपा जाए। उन्होंने कहा कि जो जिस देश में रहता है, उसके लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। हर एक को राष्ट्रगान गाना चाहिए। मसरूर अब्बासी ने कहा कि गाजियाबाद के मदरसों में पहले से ही राष्ट्रीय गान गाया जाता है।
शहर मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष हाजी चमन का कहना है कि जिस देश में रहते हैं, उस देश के कानून और संविधान का पालन करना नैतिक कर्तव्य है। राष्ट्रीय गान तो सभी के लिए अनिवार्य होता है। किसी धर्म या मजहब के साथ इसे जोडक़र नहीं देखना चाहिए। जब किसी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गान होता है तो हिन्दू-मुस्लिम सिख ईसाई सभी खड़े होकर इसे गाते हैं। यह हमारे देश की पहचान है।
पार्षद जाकिर अली का कहना है कि राष्ट्रीय गान गाने में किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। स्कूलों में राष्ट्रीय गान गाया जाता है। हर बच्चा गाता है, चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान। सरकार ने यह सही फैसला लिया है। इस फैसले का काफी पहले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहाकि अच्छा होगा अगर ऐसे मसलों को धर्म के लोगों पर छोड़ दिया जाता। सरकार को अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए काम करना चाहिए। उनके लिए स्कूलों का निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी के कार्य करना चाहिए।
बसपा नेता डॉ. हारून का कहना है कि मदरसों में राष्ट्रीय गान को अनिवार्य करने के फैसले से किसी को कोई ऐतराज नहीं है। बशर्ते कि इसे किसी धर्म के साथ ना जोड़ा जाए। राष्ट्रीय गान सभी के लिए अनिवार्य है। हम राष्ट्रीय गान नहीं गाएंगे तो कौन गाएगा। मदरसों में पढऩे वाले बच्चों में राष्ट्र के प्रति प्रेम और सदभाव बढ़ेगा।