युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। मेरठ रोड इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित केबिल बनाने की एक फैक्ट्री ने एक ऐसे तरीके का इजाद किया है, जिससे बिजली का उत्पादन खर्च काफी कम हो सकता है। कंपनी की ओर से शुक्रवार को बिजली उत्पादन का डेमो किया गया। मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र स्थित देशराज केबिल्स में दो इंजीनियरों ने पानी और हवा से बिजली उत्पादन करने का नया तरीका खोज निकाला है। इसके लिए फैक्ट्री परिसर में ही पिछले तीन साल से प्रयोग किया जा रहा था। यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा।
इंजीनियरों की टीम ने पानी और हवा के मिश्रण से बिजली बनाने में सफलता हासिल कर ली है। फैक्ट्री परिसर में एक बड़ा सा टैंक बनाया गया है, जिसमें पानी रखा गया है। इसके बाद गड़ाडिय़ों से चलने वाले पंप से पाइप से हवा का मिश्रण कराया जा रहा है। इससे बिजली पैदा हो रही है।
कंपनी के इंजीनियर रामानुज तिवारी ने बताया कि कोयले से प्रति यूनिट बिजली बनाने में करीब तीन रुपए का खर्च आता है, जबकि इस प्रक्रिया से बनी एक यूनिट बिजली का खर्च एक रुपए से भी कम आएगा। इस प्रोजेक्ट के साथ लखनऊ जल निगम में कार्यरत इंजीनियर अमित सेहरावत भी जुड़े हैं। अमित सेहरावत ने बताया कि दुनिया के कई देशों में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए जीवाश्व ईंधन का विकल्प तलाशा जा रहा है। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता खत्म करने के लिए ग्रीन इलेक्ट्रिसिटी की खोज की जा रही है। इसी के तहत टीम ने पानी और हवा के मिश्रण से बिजली बनाने पर शोध जारी रखा। इसके लिए हाइड्रोलिक डैम बनाया गया। जिसे वायु के साथ जोड़ा गया।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया के कई देशों में सोलर एनर्जी पर शोध कार्य चल रहे हैं। हवा और सूरज की रोशनी से चलने वाले संयंत्रो की कामयाबी के बाद अब दूसरे विकल्प की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि हवा और पानी पर अगर बड़े पैमाने पर संयंत्र लगाए जाए तो कमर्शियल तरीके से बिजली का उत्पादन हो सकता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने प्रयोग के नतीजों को ऊर्जा मंत्रालय और पारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय के समक्ष पेश करेंगे। अगर इस प्रक्रिया से बिजली उत्पादन होती है तो न सिर्फ बिजली की जरूरत को पूरा किया जा सकता है, बल्कि सस्ती दर पर भी बिजली मिल सकती है।
इंजीनियर रामानुज तिवारी ने बताया कि दुनिया के कई देशों में हाइड्रोजन फ्यूल और बायो फ्यूल्स पर भी काम चल रहा है। परंतु इन दोनों तकनीकों में बिजली की जरूरत पड़ती है। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल और पानी के उत्प्लावन बल के सिंक्रोनाइजेशन के बाद बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। इसके लिए एक जीबीपी प्लांट लगाया गया है। ये मशीन चौबीसों घटें काम कर सकती है। इस टैक्नोलॉजी के जरिए भारत अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी एक पहचान बना सकता है। अमित सेहरावत ने इस टेक्नोलॉजी के पेटेंट के लिए आवेदन किया है।