विरोध में उतरे आरडब्ल्यूए के कई पदाधिकारी
युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। राजनगर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित पीयूष गर्ग का कोरोना से निधन होने के बाद से अध्यक्ष पद को लेकर विवाद बना हुआ है। नया विवाद अब वेलफेयर के उपाध्यक्ष जीपी अग्रवाल को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर शुरू हो गया। एसोसिएशन के मुख्य संयोजक वीरेंद्र सारस्वत ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि असंवैधानिक तरीके से कुछ लोगों ने जीपी अग्रवाल को कार्यवाहक अध्यक्ष बना दिया जो पूरी तरह से गलत है और उसके खिलाफ संविधान के अनुसार लड़ाई लड़ी जाएगी।
वीरेंद्र सारस्वत ने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से अनुचित और असंवैधानिक है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जिनको अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें किसी प्रकार का कोई अनुभव नहीं है। लेकिन संस्था को लूटने के लिए उन्हें कार्यवाहक अध्यक्ष पद दिया गया है। जीपी अग्रवाल चुनाव के दौरान एग्ज़ीक्यूटिव कमेटी का चुनाव हार गए थे लेकिन व्यक्तिगत कारणों से उन्हें उपाध्यक्ष बना दिया गया लेकिन अब वह संस्था के कार्यवाहक अध्यक्ष बन गए हैं जबकि कुछ समय पहले उन्होंने कार्यवाहक अध्यक्ष बनने से इंकार कर दिया था। वीरेंद्र सारस्वत ने कहा कि जिस व्यक्ति को संस्था में काम करने का कोई अनुभव नहीं है, उसे जिम्मेदारी वाला पद कैसे दिया गया।
उन्होंने क्षेत्र के लोगों से भी इस निर्णय का विरोध करने की अपील की है। वहीं वेलफेयर के पूर्व अध्यक्ष विनीत शर्मा ने भी इसका विरोध जताया है। विनीत शर्मा ने बताया कि वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल नौ मार्च, २०२० को समाप्त हो चुका है और इससे पहले चुनाव होना था। लेकिन देश में कोरोना संक्रमण की लहर के चलते चुनाव स्थगित होते रहे। संस्था हित में चुनाव कराया जाना बेहद जरूरी है। जब देश में अन्य चुनाव हो सकते हैं तो फिर संस्था के चुनाव में देरी नहीं होनी चाहिए। वर्तमान कार्यकारिणी संवैधानिक रूप से अपने अधिकार खो चुकी है।
उन्होंने कहा कि संस्था के संविधान के अनुसार अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सारी पावर उपाध्यक्ष की होगी। यदि अध्यक्ष सचिव आम सभा की बैठक नहीं बुलाते, तब १० एग्ज़ीक्यूटिव बॉडी के सदस्य आम सभा बुलाकर अध्यक्ष का चुनाव करा सकते हैं। चुनी हुई समिति केवल दो वर्ष के लिए मान्य होती है। दो वर्ष के कार्यकाल के दौरान ही अधिकार लागू होते हैं और उसके उपरांत समिति द्वारा लिए गए निर्णय असंवैधानिक होंगे। विनीत शर्मा ने कहा कि चुना हुआ सेक्टर प्रतिनिधि ही उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सह सचिव बन सकता है। जीपी अग्रवाल को संत शरण सिंह ने सेक्टर चुनाव में हरा दिया था लेकिन संविधान के नियमों के खिलाफ जीपी अग्रवाल को उपाध्यक्ष बनाया गया और अब वह कार्यवाहक अध्यक्ष बन गए हैं। पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि चुनी हुई कार्यकारिणी के पदाधिकारी संविधान के अनुसार कार्य करें ताकि किसी प्रकार का कोई विवाद ना हो।