युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। प्रख्यात कथावाचक विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि गंगा नदी हमारे लिए सिर्फ नदी नहीं है, यह हमारे जीवन की रेखा है। हर हर गंगे, हर हर महादेव की ध्वनि जीवन में स्फूर्ति भरती है। हिन्दी भवन में आयोजित श्रीराम कथा के पांचवे दिन उन्होंने श्रीराम के जीवन से जुड़े कई प्रंसगों को बहुत ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। बीच-बीच में भजन सुनाकर भक्तों को भक्तिभाव में विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ज्ञान और जानकी जी भक्ति की प्रतीक है। महापुरुषों की कोई जाति धर्म नहीं होता। महापुरुष किसी जाति विशेष की धरोहर नहीं होते वह संपूर्ण समाज के होते हैं। मंगलमय परिवार कथा समिति की ओर से हिन्दी भवन में आयोजित श्रीराम कथा के पांचवे दिन संत विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि आज हमने महापुरुषों और देवी-देवताओं को भी जातियों- धर्म के सांचे में ढाल लिया है, जबकि महापुरुष किसी जाति विशेष की धरोहर नहीं होते वह संपूर्ण समाज के होते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रभु को प्राप्त करने के लिए हमें तीन काम करने पड़ते हैं। हमें बाग में जाना पड़ता है, सरोवर में स्नान करना पड़ता है और गौरी पूजन करना होता है। सत्संग ही हमारे लिए बाग है, संत के हृदय की सेवा करना ही सरोवर में स्नान करना है और भगवान के प्रति ईष्ट के प्रति श्रद्धा रखना ही गौरी पूजन है। प्रभु श्रीराम ज्ञान के प्रतीक हैं और जानकी जी भक्ति की प्रतीक हैं। ऋषि वाल्मीकि, भगवान परशुराम, संत रविदास तथा अन्य महापुरुषों, देवी देवताओं को भी हम जाति के चश्मे से देखने लगे हैं, जबकि महापुरुष किसी जाति विशेष के नहीं होते महापुरुष पूरे समाज की धरोहर होते हैं। इस अवसर पर आयोजन समिति के संयोजक मयंक गोयल, सह संयोजक मनीष अग्रवाल, कोषाध्यक्ष अंकुर गर्ग, रविमोहन गुप्ता, वीके अग्रवाल, बीके शर्मा हनुमान, वीरेंद्र सारस्वत, अमरदत्त शर्मा आदि उपस्थित थे।