खतौली विधानसभा उपचुनाव में मुकाबला तो भाजपा और रालोद गठबंधन के बीच हो रहा है, मगर साख सतवीर त्यागी, श्रीकांत त्यागी औा नंदकिशोर गूर्जर की दाव पर लग गई है। नंद किशोर लोनी से विधायक हैं और मदन भैया को वहां से हरा चुके हैं। खतौली उपचुनाव में जाट कार्ड भी इसीलिए खेला जा रहा है। साथ ही ब्रह्मïणों की अस्मिता और सम्मान को मुद्दा बनाया जा रहा है। इस उपचुनाव में असली परीक्षा त्यागी समाज की है। नोएडा के श्रीकांत त्यागी प्रकरण के बाद पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश में त्यागी समाज ने भाजपा के प्रति नाराजगी जताई थी। भाजपा के प्रवेश पर प्रतिबंध के बोर्ड गांव गांव लगाए गए थे। खतौली में त्यागी समाज चुनाव के नजरिए से निर्णायक भूमिका में है। भाजपा या रालोद में से जिसके भी साथ त्यागी मतदाता जाएगा उसकी जीत आसान हो जाएगी। श्रीकांत त्यागी खुद खतौली में डेरा डाले हुए हैं। श्रीकांत गांव गांव जाकर त्यागी समाज से भाजपा के खिलाफ वोट करने की अपील कर रहे हैं। अगर श्रीकांत त्यागी की बात उनका समाज मान लेता है और भाजपा के खिलाफ वोट करता है तो रालोद गठबंधन उम्मीदवार मदन भैया के लिए चुनाव बेहद आसान हो जाएगा। लंकिन यहां दूसरा पहलु भी है। भाजपा ने किठौर के पूर्व विधायक सतवीर त्यागी को त्यागी समाज के बीच उतार दिया है। अब सतवीर त्यागी अपने समाज के गांव गांव जाकर भाजपा को ही वोट देने की बात कर रहे हैं। यह देखना काफी दिलचस्प है कि त्यागी समाज सतवीर और श्रीकांत में से किसी बात मानता है। मेरठ में त्यागी समाज का धरना महीनों तक चला था। खतौली उपचुनाव तय करेगा कि त्यागी समाज अपने मान सम्मान की कहां तक रक्षा कर सकता है। अगर खतौली में भाजपा जीत जाती है तो माना जाएगा कि त्यागी समाज वोट के लिहाज से भाजपा का ही बंधवा है, सम्मान की लड़ाई केवल कागजी थी। एक बात और है कि खतौली में त्यागी समाज का युवा वर्ग श्रीकांत के साथ दिखाई दे रहा है। अब ये समर्थन भाजपा के खिलाफ वोट में तब्दील होता है या नहीं इसका पता चुनाव परिणाम के बाद ही चलेगा। सतवीर त्यागी की समाज पर कितनी पकड़ है यह भी उपचुनाव का रिजल्ट ही बताएगा। चुनाव बेशक मदन भैया और राजकुमारी सैनी के बीच हो रहा है मगर असली मुकाबला श्रीकांत त्यागी और सतवीर त्यागी के बीच देखने को मिल रहा है। क्योंकि जिन गांवों में जाकर श्रीकांत भाजपा को हराने की अपील कर रहे हैं, उन्हीं गांवों में सतवीर भाजपा को जिताने की बात कह रहे हैं। श्रीकांत भाजपा के प्रति त्यागी समाज में पनप रहे आक्रोश का प्रतीक हैं और सतवीर भाजपा के लिए त्यागी समाज के मन में दबे बैठे शांत मोह का।