युग करवट प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद। राजनीति भी एक अजीबो-गरीब माहौल पैदा करती है। जाहिर है कि चुनाव के माहौल में चर्चाएं होना स्वाभाविक है। लेकिन इन चर्चाओं में कितना दम है ये आने वाला समय ही बतायेगा। अब इस तरह की चर्चाएं चल रही हैं कि इस बार भी प्रदेश में फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हो रही हैं कि अगर भाजपा का बहुमत कम रह गया तो बहुजन समाज पार्टी भाजपा को सहयोग करेगी। दरअसल, इन चर्चाओं में दम उस वक्त पड़ा जब जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बसपा ने अपने आपको पूरी तरह अलग कर लिया और इसका लाभ पूरी तरह से भाजपा को मिला।
प्रदेश की बात करें तो बसपा के जिला पंचायत सदस्य चुनाव में काफी संख्या में सदस्य चुनाव जीते थे। लेकिन इतनी बड़ी जीत होने के बाद भी बसपा ने अपना कोई भी उम्मीदवार खड़ा नहीं किया और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिला। अगर गाजियाबाद की ही बात करें तो गाजियाबाद में बसपा जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में नंबर एक की पार्टी बनकर उभरी। पूरे जिले में भगवाकरण होने के बाद भी नीला हाथी खूब झूमा और 14 सदस्यों में से पांच सदस्य बसपा के जीते।
दो सदस्य मात्र सत्तारूढ़ दल भाजपा के जीते, एक निर्दलीय और बाकी रालोद और सपा के जीते। पांच सदस्य होने के बाद भी उम्मीदवार ना खड़ा करके चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। यही हाल प्रदेश के अन्य जनपदों में भी देखा गया। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है कि कहीं ना कहीं 2022 के चुनाव में भाजपा की सीटें बहुमत से कम रह गईं तो बसपा के सहारे भाजपा एक बार फिर सत्ता हासिल कर सकती है। लेकिन अगर बात करें बसपा प्रमुख मायावती की तो उन्होंने एक बार नहीं, कई बार भाजपा को कठघरे में खड़ा किया है। इतना ही नहीं, मुसलमानों के मामले में भी बसपा प्रमुख ने खुलकर बयानबाजी की है और उन्होंने भाजपा को आड़े हाथों लिया है। गाजियाबाद में संघप्रमुख मोहन भागवत द्वारा मुसलमानों के समर्थन में दिए गये बयान पर सबसे पहले अगर खुलकर किसी ने अपनी बात रखी, बसपा ने ही रखी।
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि आरएसएस प्रमुख की बातों पर भरोसा नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इनकी करनी और कथनी में बहुत अंतर है। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख का यह बयान मुंह में राम और बगल में छुरी जैसा है। इतना ही नहीं, धर्मांतरण मामले को लेकर भी बसपा प्रमुख मायावती ने बहुत खुलकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वास्तव में अगर कोई दोषी है तो उसको सख्त से सख्त सजा दी जाये। उन्होंने कहा कि ये बताया गया कि कई साल से ये लोग काम कर रहे थे तो फिर मायावती ने कहा कि ये खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं और अगर ऐसा नहीं है तो फिर किसी को भी बदनाम नहीं करना चाहिए। मायावती का यह बयान अपने आप में इस बात का यह संकेत है कि वे जब मौका मिलता है, भाजपा को कठघरे में खड़ा कर देती है। जो बातें सपा प्रमुख को कहनी चाहिएं थीं, वो बातें मायावती कह रही हैं। बहरहाल फिर ये राजनीति है, कब कौन किसका दोस्त बन जाये कुछ नहीं कहा जा सकता और जो चर्चाएं चल रहीं हैं कि अबकी बार फिर भाजपा सरकार, बसपा के सहारे ये चर्चाएं हकीकत में बदल जायें।
अब राजनीति में कब कौन किसके साथ खड़ा दिखाई देता है, कुछ नहीं कहा जा सकता। उत्तर प्रदेश के उदाहरण सामने हैं और अभी हाल फिलहाल में पश्चिम बंगाल में जो तस्वीर देखी, उससे यही लगता है कि राजनीति में कब, कौन, किसके साथ फोटो में दिखाई दे कह नहीं सकते।