मुगल शासनकाल में हिन्दू धार्मिक यात्राओं पर लगाए जाने वाले जजिया कर के बारे में हम सभी जानते हैं। यात्रा पर जाने वाले सभी यात्रियों को शासन को कर चुकाना होता था। यह भी हम सभी जानते हैं कि गाजियाबाद में दूधेश्वर नाथ मंदिर की महत्ता क्या है। इस मंदिर की प्रसिद्घि गाजियाबाद या उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है बल्कि दुनिया भर में हैं। दूर दूर से श्रद्घालु दूधेश्वर मंदिर में पूजन, दर्शन करने आते हैं। स्थानीय लोग तो रोज ही सैंकडों की संख्या में मंदिर जाते हैं। सोमवार या दूसरे पर्व-त्योहार पर मंदिर पहुंचने वाले श्रद्घालुओं की संख्या हजारों तक पहुंच जाती है। दूधेश्वर मंदिर के आसपास कहीं भी गाड़ी खड़े करने के लिए स्थान नहीं हैं। पार्किंग अगर है भी तो केवल जिला एमएमजी अस्पताल में हैं। वहां मरीजों के वाहन ही इतने हो जाते हैं कि अन्य कोई अपना वाहन वहां खड़ा कर ही नहीं सकता। ऐसे में दूधेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन करने क लिए आने वाले श्रद्घालु अपने वाहन जिला एमएमजी अस्पताल के सामने फ्लाई ओवर के नीचे खड़े कर दिया करते थे। अब अचानक से नगर निगम ने फ्लाई ओवर के नीचे के स्थान को पार्किंग घोषित कर दिया। अब यहां मंदिर में दर्शन करने आने वाले जो श्रद्घालु फ्लाई ओवर के नीचे गाड़ी खड़ी करने वालों से पार्किंग शुल्क वसूला जाने लगा। इससे वहां अव्यवस्था फैलने लगी। मामला मंदिर के महंत नारायण गिरी तक पहुंचा। शायद उन्होने इस बारे में नगर निगम अधिकारियो से बात भी की होगी। क्योंकि इतने बड़े पद पर बैठा व्यक्ति एकाएक ही आंदोलन की बात नहीं करता। जब दूधेश्वर मंदिर के महंत नारायण गिरी ने आंदोलन की चेतावनी दी तब नगर निगम प्रशासन में हडकंप मच गया। नगर आयुक्त ने अधिकारियों की बैठक बुलाई। कहा जा रहा है कि उन्होनें अधिकारियों से सारा मामला समझा और फिर अधिकारियों के एक प्रतिनिधि मंडल को मंदिर में महंत से बात करने के लिए भेजा। अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम के पार्किंग विभाग ने बिना नगर आयुक्त की अनुमति लिए या उनके संज्ञान में लाए ही यहां पार्किंग शुरू कर दी थी? बिना यह समझे कि इससे कानून व्यवस्था की कितनी बड़ी स्थिति खड़ी हो सकती थी। अब यदि नगर आयुक्त की अनुमति लिए बिना या उनको बताए बिना ही इतना बडऩ्ा कदम उठाया गया तो नगर आयुक्त ऐसा करने वाले अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई करने जा रहे हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्घालुओं से पार्किंग शुल्क वसूलना क्या गाजियाबाद नगर निगम द्वारा आधुनिक जजिया कर माना जाए? इससे पहले यशोदा अस्पताल की पार्किंग पर अधिक वसूली की शिकायत की गई थी, उस पर भी नगर आयुक्त कुछ नहीं कर पाए थे।