गाजियाबाद (युग करवट)। लोकसभा सिर पर हैं, विपक्ष पार्टी कांग्रेस और सपा अपनी उधेड़बुन में उलझे हैं। अभी तक तय नहीं हो पाया है कि कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी और यदि लड़ेगी तो उसक हिस्से में कितनी सीटें होंगी। उधर, कांगे्रेस के सांसद राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 14 फरवरी से उत्तर प्रदेश से गुजरेगी। ऐसे में बड़ा सवाल है कि अखिर पेंच कहां फंसा है? ऐसा भी कहा जा रहा है कि कांगे्रस उस जिताऊ फार्मूले में उलझ गई है जो कभी उसे सत्ता तक पहुंचाता था। यानि, पार्टी ‘फार्मूला-41’ को किसी भी सूरत को यूपी के धरातल पर लाना चाहती है। पार्टी चाहती है कि किसी भी सूरत में दलित और मुस्लिम को साथ लाकर पार्टी के पक्ष में खड़ा किया जाए। ताकि, एक बार फिर पार्टी मजबूती के साथ अपनी पुरानी पटकथा लिख सके। उत्तर प्रदेश में पार्टी हर सूरत में मायावती की पार्टी के साथ खड़ा होना चाहती है। हालांकि, मायावती की ओर से बार-बार यह कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में वो किसी से भी गठबंधन नहीं करेगी। सन् 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को मुस्लिम समाज का भरपूर वोट मिला।
इसके बावजूद भी समाजवादी पार्टी यूपी में सरकार नहीं बना पाई। वर्तमान में कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार लोकसभा चुनाव में मुस्लिम समाज का भरपूर वोट उसके पक्ष में आएगा। भाजपा की बात की जाए तो पिछले यानि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 37 प्रतिशत वोट मिला था, 2014 की बात की जाए तो भाजपा को उत्तर प्रदेश से 31 प्रतिशत वोट मिला था।
दोनों ही चुनावों में यूपी में भाजपा का परचम लहराया था। ऐसे में यनि 41 प्रतिशत वोट यानि मुस्लिम और दलित साथ खड़ा होता है तो वो निश्चित ही भाजपा के लिए चुनौती बनकर उसके मंसूबों पर पानी फेर सकता है। कांग्रेस यह भी जानती है कि सन 1989 तक दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण उसके पक्ष में एकजुट जाता रहा था तो भाजपा 2 सीटों के फेर में फंसी रही थी। कांग्रेस जानती है कि फार्मूला-41 ही उसके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। यही कारण है कि अंतिम दौर तक कांग्रेस इस फार्मूले को अमली जामा पहनाए जाने की फिराक में लगी हुई है।
जवाहर लाल नेहरु और डॉ. अंबेडकर की तस्वीर साथ-साथ
गाजियाबाद (युग करवट)। कांग्रेस हर सूरत में अपने मतदाताओं को विश्वास दिलाना चाहती है कि दलित और मुस्लिम वर्ग की सबसे हितैषी पार्टी है। यही कारण है कि अभियान को पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के हाथों में सौंपा गया है। टॉस्क दिया गया है कि मुस्लिम समुदाय के नेता अभियान को लेकर दलित बस्तियों तक पहुंचे और इसका प्रचार प्रसार करें। एक तस्वीर दलित समुदाय में बांटे जिसमें देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु और संविधान के पचियता डॉ. अंबेडकर साथ-साथ नजर आ रहे हैं। कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के जिलाध्यक्ष सलीम अहमद सैफी कहते हैं कि कांग्रेस के मुस्लिम नेता अभियान को लेकर बेहद संजीदा हैं। जल्द ही वे गंभीरता से इस अभियान को अमली जामा पहनाते हुए नजर आएंगे। उन्होंने विश्वास जताया है कि अभियान का असर लोकसभा चुनाव में भी निश्चित ही नजर आएगा।