प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम
२२ जनवरी को पांच सौ साल का सपना पूरा होने जा रहा है। यानि भगवान श्रीराम के भव्य राम मंदिर का शुभांरभ होने जा रहा है। कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सर्वेसर्वा रहेंगे और उन्हीं के हाथों प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होगा। विश्व हिंदू परिषद अध्यक्ष मुख्य यजमान की भूमिका में रहेंगे। बकायदा कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र जारी हो रहे हैं। देशवासियों में उत्साह है, संतों में उल्लास है लेकिन इस बीच धर्माचार्यों का ये भी कहना है कि वो इस कार्यक्रम में जाकर क्या करेंगे। क्योंकि जब मोदी जी वहां पर सब कार्यक्रम करेंगे तो क्या हम तालियां बजाएंगे। इसी तरह का एक वीडियो स्वामी निश्चलानंद सरस्वती शंकराचार्य वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा कि उनके पास फोन आया था जिसमें बताया गया कि आपको कार्यक्रम में आना है और आप एक ही व्यक्ति को साथ ला सकते हैं। सरस्वती महाराज का कहना है कि अगर वो सौ लोगों को लाने के लिए कहते तो मैं नहीं जाता क्योंकि वहां पर मोदी जी ही सबकुछ करेंगे तो क्या हम वहां पर तालियां बजाएंगे। मतलब साफ है कि इस कार्यक्रम में संतों को ही आगे रखना चाहिए
था। यहीं कारण कि विपक्ष अब यही कह रहा है कि भाजपा ने पूरे कार्यक्रम को हाईजैक कर लिया और इसी के सहारे एक बार फिर २०२४ चुनाव जीतने की तैयारी में है। यहां ये भी गौरतलब है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू से जब किसी ने मंदिर पर नारियल फोडऩे को कहा था कि वो बोले थे कि वह धर्मनिरपेक्ष देश के प्रधानमंत्री है। बहरहाल इसमें कितनी सच्चाई है ये नहीं पता लेकिन शंकराचार्य सरस्वती जी का बयान जरूर चौंकाने वाला है। वहीं तीसरी आंख को पता चला है कि जब आडवाणी जी ने राममंदिर को लेकर यात्रा निकाली थी तो उस समय नरेंद्र मोदी संगठन के सचिव थे और यात्रा में साथ थे, तब उन्होंने सौगंध खायी थी कि वो तभी अयोध्या आएंगे जब भव्य राम मंदिर बनेगा। आज वो सौगंध उनकी पूरी हो रही है। भले ही विपक्ष कुछ कहे लेकिन ये हकीकत है कि देश में राम मंदिर की लड़ाई भाजपा और विश्व हिंदू परिषद ने लड़ी इसलिए जश्न मनाने का अधिकार निसंदेह उनका भी है और वो मना रहे हैं। पूरा देश मना रहा है। इस उत्साह पर कोई राजनीति नहीं होना चाहिए। पांच सौ साल का सपना पूरा हो रहा है इसीलिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम जिन्होंने आपसी सौहार्द का संदेश दिया। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी को मिलकर राजनीति से ऊपर उठकर इस भव्य समारोह के साक्षी बनना चाहिए। जय हिंद