वरिष्ठ संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। चुनाव-दर-चुनाव कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सिकुड़ती जा रही है। पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है और चेहरों से जोश गायब है। यही कारण है कि किसी जमाने में राजनीतिक सरगर्मियों का केंद्र कहलाए जाने वाले कांग्रेस कार्यालयों की कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं। कांग्रेस पार्टी प्रदेश में महज 2 विधानसभा और 1 लोकसभा सीट पर सिमट गई है। पार्टी का विश्वास इस कदर डगमगा गया है कि ‘यूपी चीफ’ की कुर्सी पर बैठाने के लिए पार्टी महज एक अदद मजबूत नेता तलाश नहीं कर पा रही है। प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जहां हाईकमान असमंजस में है, गुजरते दिन के साथ पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं में कायास लगाए जाने का दौर जारी है।
चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष का पद खाली पड़ा हुआ है। विधानसभा चुनाव के बाद यूपी के प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही पंजाब और उत्तराखंड के अध्यक्षों ने भी इस्तीफे दिए थे। हालांकि, दोनों प्रदेशों में प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में इसी साल निकाय चुनाव होने हैं और उसके बाद सन् 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियां पार्टी को करनी हैं। ऐसे में रिक्त पड़ा प्रदेश अध्यक्ष का पद पार्टी के डगमगाते विश्वास की कहानी कह रहा है। पिछले दिनों कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के लिए पीएल पुनिया, आचार्य प्रमोद कृष्णम्, पूर्व अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री, विधायक वीरेन्द्र सिंह, विधानमंडल दल की नेता अराधना मिश्रा ‘मोना’, नदीम जावेद आदि का नाम तेजी से चला था, लेकिन किसी पर पार्टी हाईकमान की मुहर नहीं लग पाई। वर्तमान में प्रदेश अध्यक्ष के लिए एक अदद मजबूत और भरोसेमंद चेहरे की तलाश कांग्रेस को है, लेकिन उसकी तलाश पूरी नहीं हो पा रही है।