गाजियाबाद (युग करवट)। रालोद में महानगर एवं जिलाध्यक्ष घोषित हुए लंबा अरसा बीत चुका है। इसके बावजूद भी जिला एवं महानगर अध्यक्षों की कमेटियां घोषित नहीं हो पाई है। कमेटी घोषित नहीं होने के पीछे अब पार्टी कार्यकर्ता ही तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं। पार्टी के कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि अध्यक्षों को लेकर पार्टी हाईकमान संशय की स्थिति में है। यही कारण है कि रालोद संगठन की कमेटियां घोषित नहीं हो पाई हैं।
रालोद में महानगर अध्यक्ष नियुक्त हुए लगभग एक साल और जिलाध्यक्ष नियुक्त किए जाने को आठ महीने का समय बीत चुका है। इसके बावजूद अभी तक कोई भी कमेटी नहीं घोषित हुई है। नगर निकाय चुनाव से पूर्व उम्मीद जताई जा रही थी कि रालोद की कमेटियां घोषित हो जाएंगी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सूत्र बता रहे हैं कि कमेटियां बनाकर हाईकमान के पास भेजी जा चुकी हैं लेकिन उन्हें स्वीकृति नहीं मिल पाई है। ऐसे में पार्टी के सूत्र दावा कर रहे हैं कि रालोद में वर्तमान अध्यक्षों को लेकर पार्टी हाईकमान संशय की स्थिति में है। शायद, भविष्य में बदलाव को लेकर कमेटियों पर रोक लगाई गई है। मामला जो भी हो लेकिन यह सही है कि रालोद का संगठन बिना किसी कमेटी के चल रहा है। पार्टी के कार्यकर्ता लंबे अरसे से जिला और महानगर कमेटियां घोषित किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।
पद के इंतजार में घरों पर बैठे हैं रालोद कार्यकर्ता
गाजियाबाद। आंदोलन और धरने प्रदर्शनों के लिए जानी जाने वाली रालोद में सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ता घरों पर बैठ गए हैं। पार्टी में होने वाले कार्यक्रमों पर भी वीराम सा लग गया है। पार्टी के लगातार रहने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि पदों के बिना काम करना भी बेमानी है। इससे बेहतर है कि वे घरों पर ही बैठ जाएं। यही कारण है कि रालोद के कार्यकर्ता सडक़ों पर दिखाई ना देकर घरों में बैठे हैं।