नई दिल्ली। कोरोना जब दुनिया के लिए तबाही लेकर आया, करोड़ों लोगों की नौकरियां छीन लीं, करोड़ों परिवारों की बचत खत्म हो गई, अपना और अपनों का इलाज करवाने के लिए लोगों को कर्ज लेना पड़ा, तब दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी थे, जिन्हें इस महामारी से फायदा हो रहा था। कोरोना के दो साल में अरबपतियों ने इतनी कमाई की है, जितना उन्होंने 23 साल में नहीं कमाया था। ये दावा ऑक्सफैम इंटरनेशनल की रिपोर्ट में किया गया है। ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया के अरबपतियों की कोरोना के शुरुआती 24 महीनों में जितनी संपत्ति बढ़ी, उतनी 23 साल में भी नहीं बढ़ी थी। दुनिया में इस समय 2 हजार 668 अरबपति हैं। ये अरबपति सामूहिक रूप से 12.7 ट्रिलियन डॉलर यानी 984.95 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। इनके पास जितनी संपत्ति है, वो दुनिया की जीडीपी का 14 प्रतिशत हिस्सा है।
1. अमीर और अमीर हुआ: महामारी आने के बाद दुनिया में 573 अरबपति बढ़ गए। यानी हर 30 घंटे में एक अरबपति बढ़ा। इन अरबपतियों की संपत्ति महामारी के दौर में 42 फीसदी यानी 293.16 लाख करोड़ रुपये बढ़ गई। दुनिया के 3.1 अरब लोगों के पास इतनी संपत्ति नहीं है, जितनी संपत्ति 10 सबसे अमीर लोगों के पास है।
2. गरीब और गरीब हुआ: कोरोना महामारी के कारण दुनिया के 99 फीसदी लोगों की कमाई में गिरावट आई है। अकेले 2021 में ही 12.5 करोड़ से ज्यादा लोगों की नौकरियां चली गईं। 2021 में सबसे गरीब 40 फीसदी लोगों की कमाई में गिरावट आ गई। महामारी से पहले औसतन 6.7 फीसदी लोगों की कमाई गिर रही थी।
3. कंपनियां हुईं मालामाल: महामारी में दवा कारोबार से जुड़े 40 लोग अरबपति बन गए। मॉडर्ना और फाइजर जैसी कंपनियों ने हर सेकंड 1 हजार डॉलर (77,555 रुपये) का मुनाफा कमाया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फार्मा कंपनियों ने सरकारों से जेनरिक प्रोडक्शन के लिए 24 गुना ज्यादा चार्ज लिया।
4. महिलाएं हुईं बेरोजगार: महामारी से पहले जेंडर पे का अंतर 100 साल में खत्म होने का अनुमान था, लेकिन अब इसमें 136 साल लग सकते हैं। 2020 में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लेबर फोर्स से बाहर होने की आशंका 1.4 गुना ज्यादा थी। 2019 के मुकाबले 2021 में नौकरी करने वाली महिलाओं की संख्या 1.3 करोड़ कम थी। जबकि, कामगार पुरुषों की संख्या 2019 के स्तर पर पहुंच गई।
5. गरीब जियेंगे भी कम: अमीर देशों में रहने वाले लोगों की औसत आय गरीब देशों में रहने वालों की तुलना में 16 साल ज्यादा है। हर साल 56 लाख लोग स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने के कारण मर जा रहे हैं। इस हिसाब से हर दिन 15 हजार मौतें होने की आशंका है।
ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल खाने के सामान की कीमतें 33.6 प्रतिशत बढ़ी थी।