– वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य शर्मा ने लगाया आरोप, सस्ती लोकप्रियता के लिए पुलिस ने दर्ज किया गंभीर धारा में मुकदमा –
नोएडा (युग करवट)। थाना सेक्टर-39 क्षेत्र के सेक्टर-96 के पास बीते रविवार 4 दिसंबर को जगुआर कार के चालक सैम्यूअल आइयू प्यस्तरे द्वारा दीपिका त्रिपाठी नामक युवती को टक्कर मारकर उसकी मौत कारित करने के मामले में नोएडा पुलिस को कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी है। इस मामले में पहले नोएडा पुलिस ने कार चालक के खिलाफ लापरवाही से मौत कारित करने की धारा में मुकदमा दर्ज किया था। 2 दिन बाद पुलिस आयुक्त ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया तथा नोएडा पुलिस ने इस मामले में धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर, कार चालक को दोबारा से गिरफ्तार कर लिया। घटना वाले दिन नोएडा पुलिस ने आरोपी को थाने से जमानत दे दी थी। बाद में उसे मंगलवार की शाम को दोबारा से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, कोर्ट ने उसे 1 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा।
बुधवार को आरोपी कार चालक के ऊपर पर लगाई गई धारा 302 की रिमांड पर दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य शर्मा ने पीडि़त की तरफ से आपत्ति लगायी। इस मामले में सीजीएम गौतमबुद्धनगर की न्यायालय में पुलिस और आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने बहस की। आरोपी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में उनके मुवक्किल के साथ ज्यादती की गई है। पहले पीडित पक्ष ने इस मामले में सड़क दुर्घटना की धारा में मुकदमा दर्ज करवाया, पुलिस ने उनके मुवक्किल को गिरफ्तार कर उन्हें जमानत दी। बाद में सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए पुलिस ने उनके मुवक्किल के खिलाफ धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर दोबारा से गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने बताया कि उनका मुवक्किल के हाईप्रोफाइल होने और महंगी कार होने की वजह से पुलिस अधिकारियों ने इस तरह का कृत्य किया। उन्होंने कहा कि धारा 302 उस व्यक्ति पर लगाई जाती है जो किसी की इरादतन हत्या करता है। उन्होंने बताया कि पुलिस के पास घटनास्थल की कोई सीसीटीवी फुटेज भी नहीं है। जिससे यह साबित हो कि उनके मुवक्किल ने स्कूटी सवार युवती को हत्या के नियत से टक्कर मारा।
बरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने उनकी बात को गंभीरता से सुना तथा इस मामले में धारा 302 की जगह धारा 304 के तहत रिमांड बनाया। उन्होंने कहा कि उनका मुवक्किल पुलिस को जांच में पूरा सहयोग करेगा तथा इस मामले में वह न्यायालय मैं विधिक अपील करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि रविवार की घटना के दिन जब पुलिस ने उनके मुवक्किल को थाने से जमानत दे दिया, उसके बाद मंगलवार को पुलिस उनके घर पहुंची तथा कहा कि घटनास्थल का मुआयना कर उनका बयान दर्ज करना है। इस बहाने पुलिस उन्हें घर से थाने लेकर आयी तथा दोबारा से उन्हें जेल भेज दिया। अधिवक्ता के अनुसार एक बहुराष्ट्रीय बैंक में काम करने और जगुआर कार होने की वजह से उनके मुवक्किल के खिलाफ गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट में यह बात भी सामने आई कि थाना बिसरख क्षेत्र में स्कूल से लौट रही 4 वर्ष की छात्रा को ट्रैक्टर चालक ने रौद दिया। उस मामले में पुलिस ने धारा 304 -ए के तहत मुकदमा दर्ज किया, जबकि इस मामले में हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया।
बताया जाता है कि दुर्घटना में जिस युवती की मौत हुई है उसके परिजन भी पुलिस द्वारा धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करने से संतुष्ट नहीं है। पुलिस उनके घर दोबारा से तहरीर लेने गई थी, लेकिन उन्होंने पुलिस का कोई सहयोग नहीं किया। पुलिस सूत्रों का दावा है कि घटना वाले दिन पीडि़़त पक्ष के अपने वकील के साथ जगुआर कार के चालक को खुद पकड़कर थाने ले कर आए थे। उन्होंने ही पुलिस को अपनी सुपुर्दगी में चालक को दिया था, तथा वकील के सामने ही पीडि़त पक्ष ने तहरीर लिखकर पुलिस को दी थी। उस समय इस घटना को सड़क दुर्घटना ही बताया गया था।