१९ साल में दिया ६० से अधिक संगीन अपराधिक वारदातों को अंजाम
युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। आज से लगभग १५ साल पहले चिनाई मजूदर के रूप में अपना पेट पालने वाला मुकीम कुछ ही समय के अंदर आज का दुर्दांत बदमाश मुकीम काला बन गया। मुकीम उर्फ काला कितना दुर्दांत बदमाश रहा होगा, इसका अंदाज़ा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उस पर हरियाणा, उत्तराखंड और यूपी सहित कई प्रदेशों में डकैती, लूट, राहजनी, हत्या, हत्या के प्रयास व रंगदारी मांगने जैसे ६० से अधिक संगीन अपराधिक मामलें प्रदेशों के विभिन्न थानों में दर्ज हैं।
दशक से अधिक समय तक कई प्रदेशों में अपराधिक साम्राज्य चलाने वाले कुख्यात बदमाश मुकीम काला कल चित्रकूट जेल में हुई गैंगवार के दौरान फायरिंग में मारा गया। मुकीम के मारे जाने के बाद जहां कई प्रदेशों की पुलिस ने राहत की सांस ली। वहीं कई प्रदेशों विशेषकर पश्चिम उत्तर प्रदेश में रहने वाले लोगों खासकर दुश्मनों के लिए मौत का सबïब बन चुके मुकीम के आतंक का कल अंत भी हो गया।
जानकारी के अनुसार मुकीम काला का जन्म शामली जनपद के थाना कैराना के गांव जहानपुरा निवासी मुस्तकीम के यहां हुआ था। जिस समय काला किशोर अवस्था में था, उस समय उसका पिता मुस्तकीम अपराध जगत से जुड़कर तमंचे, पिस्टल व रिवॉल्वर की तस्करी व सप्लाई करता था। अपराधिक प्रवृत्ति वाले मुस्तकीम ने अपने पुत्र मुकीम को अपराध की दुनिया से दूर रखने के लिए उसे हरियाणा के पानीपत जिले में भेज दिया। इसके बाद मुकीम काला वहीं रहकर एक राज मिस्त्री के साथ चिनाई मजदूर का कार्य करने लगा। मजूदरी करते समय ही वह छोटी-मोटी चोरी भी करने लगा। सूत्रों के मुताबिक, मुकीम काला पुलिस के लिए सिरदर्द व जनता के लिए उस समय सिरदर्द बनता दिखाई देने लगा जब उसने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर पानीपत में डकैती डाली। इसके बाद उसने फिर कभी अपराध जगत से मुंह नहीं मोड़ा और फिर वह गैंग बनाकर संगीन वारदातों को ताबड़तोड़ रूप से अंजाम देने लगा।
सन् २०१५ में सहारनपुर पुलिस ने मुकीम उर्फ काला को गिरफ्तार किया था। पहले उसे सहारनपुर जेल में रखा गया और फिर उसे विभिन्न कारणों की वजह से महाराजगंज जेल भेज दिया गया। कुछ समय पूर्व ही प्रशासनिक एवं सुरक्षात्मक कारणों की वजह से ही मुकीम उर्फ काला को चित्रकूट जेल भेजा गया था जहां गैंगवार में उसे व महेराजुदï्दीन नामक बदमाश को तीसरे बदमाश अंशुल ने गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया जबकि अंशुल दीक्षित को पुलिस ने ढेर कर दिया।