युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौ. राजा वर्मा ने प्रधानमंत्री की ओर से तीनों कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने के फैसले को दुर्भाग्यजनक बताया। उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित लोग, जो किसानों को चोला ओढक़र खुद को किसान बता रहे हैं, उनके कारण देश के छोटे किसानों को भारी नुकसान होगा। राजा वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने छोटे किसानों के हित के लिए नेकनीयत से तीन कृषि सुधार कानून लाए थे। कुछ राजनीतिक दलों इन कानूनों से खतरा महसूस हो गया था। उन्हें लगने लगा था कि उनकी दुकान अब बंद हो जाएगी। यहीं कारण है कि किसानों के आगे कर वे आंदोलन को आगे बढ़ाते रहे। अब जब प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी, छोटी जोत के किसान इन तथाकथित किसान नेताओं से सवाल करेंगे। देश के ज्यादातर किसान इन कानूनों के फायदे को समझ चुके थे। कुछ तथाकथित किसान नेता लगातर किसानों को बरगला रहे थे। राजा वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि दीपक की लौ की तरह पारदर्शी तरीके से कृषि सुधार कानूनों को लाया गया था। इससेे देश के अस्सी फीसदी किसानों को फायदा होता लेकिन कुछ मठाधीश किसानों के कारण देश के किसानों को लाभ मिलने से रह गया। राजा वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस फैसले को चुनावी नजर से देखना सही नहीं है। चुनाव आते जाते रहते हैं लेकिन अन्नदाताओं के हितों को सोचने वाले सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी ही है। किसानों को समझाने का प्रयास किया गया लेकिन इसमें सफल नहीं हो पाए।