युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। भाजपा हमेशा से दावा करती आ रही है कि कार्यकर्ताओं से मिलने वाले सदस्यता शुल्क से ही पार्टी की गतिविधियां और चुनाव के खर्चे निकलते हैं। लेकिन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिव राइटस की ताजा रिपोर्ट का कहना है कि भाजपा को कॉरपोरेट जगत से सबसे ज्यादा चंदा हासिल हुआ। वित्तीय वर्ष 2019-20 में कॉरपोरेट और व्यावसायिक संगठनों ने राष्ट्रीय पार्टियों को 921.95 करोड़ रुपये का चंदा दिया। इनमें से भाजपा को ही 720.407 करोड़ रुपये मिले। कॉरपोरेट जगत से वामपंथी दलों को एक पैसे का चंदा नहीं मिला। 2018-19 के बीच कॉरपोरेट्स से राष्ट्रीय पार्टियों को दिए जाने वाले चंदे में 109 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को पार्टियों की ओर से एक वित्तीय वर्ष में 20,000 रुपये से अधिक का चंदा देने वाले दानकर्ताओं की जानकारी पर तैयार किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रुडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 2019-20 में भाजपा और कांग्रेस को सबसे ज्यादा डोनेशन दिया। ट्रस्ट ने एक साल में ही दोनों पार्टियों को 38 बार चंदा दिया, जो कुल 247.75 करोड़ रुपये था। प्रुडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से भाजपा को 216.75 करोड़ रुपये और कांग्रेस को 31.00 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। बीजी शिर्के कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने 2019-20 में एनसीपी को सबसे ज्यादा चंदा दिया। प्रुडेंट सबसे धनी चुनावी ट्रस्ट है और 2013-14 से भाजपा को सबसे ज्यादा फंड देने वालों में शामिल है। इलेक्टोरल ट्रस्ट्स को दिए जाने वाले कॉरपोरेट डोनेशन का लगभग 90 प्रतिशत धन उसके पास जाता है।