युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। आवासीय मकानों को कारपेट एरिया के हिसाब से हाउस टैक्स के नोटिस भेजना अब नगर निगम के गले की फांस बन सकता है। इस मामले को कई पार्षद निगम बोर्ड की बैठक में उठाने की तैयारी में लगे है। इससे पहले कार्यकारिणी की बैठक में भी यह मामला उठाया गया था। यह मामला खुद मेयर आशा शर्मा ने सदन में उठाया था। मेयर का कहना था कि सर्वेयर कंपनी की ओर से हाउस टैक्स के जो नोटिस तैयार कर जारी किए जा रहे है उनमें काफी गड़बड़ी है। इससे लोग परेशान है। कार्यकारिणी में नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने इस मामले में सफाई दी थी।
अब एक बार फिर से प्राइवेट कंपनी द्वारा दिए जा रहे बड़ी सख्ंया में गलत नोटिसों का मामला निगम बोर्ड की 21 को होने वाली बैठक में उठाया जा सकता है। इसी को लेकर कई पार्षद अभी से ही तैयारी में लगे हुए है। दरअसल हाल ही में नगर निगम ने एक प्राइवेट कंपनी से सर्वे कराया है। इस कंपनी का दावा है कि उसने करीब दो लाख ऐसी प्रॉपर्टी का पता लगाया है जिन पर अभी तक टैक्स नहीं लगा था। वहीं अब नया विवाद है कि कारपेट एरिया के हिसाब से हाउस टैक्स लगाने का। बीजेपी पार्षद राजेन्द्र त्यागी का कहना है कि प्राइवेट कंपनी की ओर से गलत तरीके से मकानो को कारपेट एरिया के हिसाब से हाउस टैक्स के नोटिस भेजे जा रहे है। जबकि नगर निगम क्षेत्र में बोर्ड बैठक में एकल युनिट के मकानों पर हाउस टैक्स कवर्ड एरिया के हिसाब से लगाने का प्रस्ताव पास है। अब माना जा रहा है कि यह मामला अब बोर्ड की बैठक में उठाया जाएगा। इस को लेकर नया विवाद पैदा हो सकता है।