भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता चाहे वो नरेंद्र मोदी हों या अमित शाह हों लगातार चुनावी मंचों से कह रहे हैं कि कांग्रेस की सरकार आ गई तो राम मंदिर का फैसला पलटवा देगी। कांगे्रस पिछड़ों का आरक्षण खत्म करके मुसलमानों को दे देगी और न जाने क्या-क्या बातें मंचों से हो रही है कि कांगे्रस की सरकार आ गई तो मुसलमानों को सबकुछ दे दिया जाएगा। इतना ही नहीं कांग्रेस के घोषणा पत्र पर भी मुस्लिम लीग की छाप की बात कही जा रही है। ठीक है चुनाव में एक दूसरे पर आरोप लगते हैं लेकिन इतिहास को भी सामने रखा जाये तो ज्यादा अच्छा है। दरअसल, जितना नुकसान मुसलमानों का कांग्रेस ने किया इतना आज तक भाजपा ने भी नहीं किया। कुछ घटनाएं छोड़ दो तो भाजपा ने कहीं भी मुसलमानों को लेकर कुछ नहीं किया और अब बार-बार कांग्रेस ऐसा कर देगी कांगे्रस वैसा कर देगी। इतिहास में जाये तो 6 दिसंबर १९९२ को जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरायी गई तो उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और प्रधानमंत्री के पद पर पीवी नरसिंहा राव थे तो फिर कैसे हुई कांगे्रस मुसलमानों की हमदर्द, मेरठ के मलियाना का दंगा हो, मुरादाबाद का दंगा हो उस समय भी केंद्र में और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार थी। नौजवानों को घर से निकालकर जब मारा जा रहा था तब भी कांग्रेस की ही सरकार थी। स्व. राजीव गांधी ने ही अयोध्या में वर्षों से बंद पड़ी बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाकर मूर्तियां रखवाईं थी तब भी कांगे्रस की ही सरकार थी। दस साल तक कांग्रेस की सरकार रही तो फिर मुसलमानों को कितना लाभ हुआ ये भी सबके सामने आज अगर ये कहा जाए कि केंद्र की मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार की योजनाओं का लाभ सभी धर्म और वर्गों के लोगों को मिल रहा है तो गलत नहीं होगा। आज अगर राशन मिल रहा है, मकान मिल रहे हैं तो वो सभी के साथ पसमांदा मुसलमानों को भी मिल रहे हैं। जिस कांग्रेस का इतिहास ये रहा हो फिर उससे कैसी उम्मीद की जा सकती है कि वो किसी का भला करेगी खासकर मुसलमानों का और आज जब भारत एक मजबूत स्थिति में है तो यह कहना युवा पीढ़ी और मजबूत भारत का अपमान होगा कि कांग्रेस की सरकार आते ही राम मंदिर का फैसला पलट जाएगा। किसकी औकात है कि अब राम मंदिर का फैसला पलटवा दे। इसलिए बयानबाजी करते वक्त इतिहास को भी सामने रखने की जरूरत है। कई दशकों तक सरकार चलाने वाली कांग्रेस ने हमेशा मुसलमानों को भाजपा का खौफ दिखाया और सत्ता पर काबिज रहे और मुसलमानों के लिए ऐसा कुछ नहीं किया जिससे उसकी नसलें याद रखे। जबकि इतिहास में जितने जख्म मिले हैं वो कांगे्रस में ही मिले हैं। भले ही चुनावी मंचों पर सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास का नारा गूंज रहा हो लेकिन कम से कम भाजपा ने बड़ा दिल तो जरूर दिखाया है। कितना अच्छा हो कि जिस तरह दस की उपलब्धियों पर भाजपा वोट मांगे और खुलकर जो हिन्दू-मुसलमान हो रहा है वो ना हो क्योंकि भाजपा के पास एक विजन भी है और उपलब्धियां भी है। आम हिन्दू भी अब हिन्दू और मुसलमान के भाषणों से ऊब गया है। केवल और केवल विकास की बात हो तब और बात होगी।
जय हिंद