युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। कई छोटे-छोटे संगठनों के समावेश से कांग्रेस का असली चेहरा उभरकर सामने आता है। इन छोटे संगठनों को फ्रंटल संगठन के नाम से जाना जाता है। विधानसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस के सभी फ्रंटल संगठनों ने मौन धारण कर लिया है। कोई आवाज किसी भी संगठन से नहीं उठ रही है।
बड़ा सवाल है कि पार्टी के फ्रंटल संगठन आखिर चुप्पी साधे क्यों बैठे हैं? कांग्रेस में हर वर्ग की समस्या को उठाने के लिए बाकायदा अलग-अलग फ्रंटल संगठन बनाए गए हैं। महिलाओं की आवाज उठाने के लिए कांग्रेस में महिला संगठन है, युवाओं की समस्याएं उठाई जाएं इसके लिए यूथ कांग्रेस पार्टी में है, श्रमिकों की समस्याएं श्रम प्रकोष्ठ के जरिए पार्टी में उठाने की जिम्मदारी सौंपी जाती है। इसके अलावा अल्पसंख्यकों की समस्याओं के लिए अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ और दलित समाज की समस्याएं उठाने के लिए पार्टी में अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ है। साथ ही कारोबारियों की समस्याएं पार्टी में व्यापार प्रकोष्ठ के जारिए उठाई जाती हैं।
कांग्रेस के मुख्य संगठन यानि जिला या महानगर कांग्रेस कमेटी की बात की जाए तो दोनों संगठन विधानसभा चुनाव के बाद नए पार्टी अध्यक्ष का इंतजार कर रहे हैं। कांग्रेस के फ्रंटल संगठनों की बात की जाए तो फिलहाल सभी शांत हैं। ऐसा लगता है कि शहर में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है।
हर तरफ शांति का वातावरण है। दरअसल, कांग्रेस हमेशा विपक्ष की भूमिका में रहते हुए आवाज उठाती रही है। कांग्रेस के फ्रंटल संगठन भी इसमें पीछे नहीं रहते हैं। ऐसे में उनका पूरी तरह से चुप बैठना ऐसे समय में अटपटा सा लगता है। खासतौर पर जब महंगाई आम जनता की कमर तोड़ रही है, तब इस शांति के मायने समझ से परे हैं।

सिर्फ सोशल मीडिया पर दिखाई देते हैं, कांग्रेस के प्रकोष्ठ
गाजियबाद। कांग्रेस पार्टी में सभी प्रकोष्ठो में जिला एवं महानगर अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। पार्टी की ओर से बाकायदा इनको आवाज उठाने के अधिकार दिए गए हैं। कांग्रेस के प्रकोष्ठ सिर्फ सोशल मीडिया पर नजर आते हैं। वो भी तब जब इन्हें पार्टी के विरोध में चल रही गतिविधियों के विरोध में ही आवाज उठानी पड़ती है। इसके अलावा पार्टी में किस प्रकोष्ठ का अध्यक्ष कौन है, शायद इसके बारे में भी पार्टी के नेता नहीं जानते होंगे। हां, सोशल मीडिया पर जरूर कांग्रेस की प्रकोष्ठों के अध्यक्ष नजर आते हैं।