युग करवट संवाददाता
लखनऊ। ओमिक्रोन और कोरोना के मामलों में अचानक बढ़ोत्तरी को देखते हुए मध्यप्रदेश के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी नाइट कफ्र्यू लगा दिया गया है। सरकार का यह फैसला 25 दिसंबर की रात 11 बजे से लागू होगा। आदेश के तहत नई गाइडलाइन भी जारी की गई। गाइडलाइन के मुताबिक शादियों में अधिकतम 200 लोग ही शामिल हो सकते हैं। रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा। इस आदेश के बाद क्रिसमस और न्यू ईयर सेलिब्रेशन की तैयारियों को झटका लगा है। 4 महीने पहले ही कोरोना केस कम होने के बाद उत्तर प्रदेश से नाइट कफ्र्यू हटाया गया था। यहां कोरोना के कुल 236 एक्टिव केस है। यहां ओमिक्रॉन के भी दो मरीज मिल चुके हैं। इसके अलावा विदेश से आने वाले यात्रियों की रिपोर्ट लगातार पॉजिटिव मिल रही है। प्रदेश की योगी सरकार ने ओमिक्रोन के मामलों को देखते हुए नई गाइडलाइंस जारी की है। प्रदेश में कोरोना की स्थिति को लेकर टीम-नाइन के साथ बैठक के बाद नाइट कफ्र्यू लगाने का फैसला लिया गया। बैठक में कोविड से बचाव के लिए ट्रेसिंग, टेस्टिंग, ट्रीटमेंट और टीकाकरण की नीति पर चर्चा की गई। बीते 24 घंटों में हुई 01 लाख 91 हजार 428 सैम्पल की जांच में कुल 49 नए संक्रमितों की पुष्टि हुई। इसी अवधि में 12 लोग उपचारित होकर कोरोना मुक्त भी हुए।
एक्टिव केसों की संख्या 266
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कुल एक्टिव कोविड केस की संख्या 266 है, जबकि 16 लाख 87 हजार 657 मरीज कोरोना को मात दे चुके हैं। आज 37 जिलों में एक भी कोविड मरीज शेष नहीं है। ऐसे में कुछ कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
मास्क नहीं तो सामान नहीं
मुख्यमंत्री योगी ने उच्चस्तरीय टीम-09 को निर्देश दिए हैं कि वो  बाजारों में ‘मास्क नहीं तो सामान नहीं’ के संदेश के साथ व्यापारियों को जागरूक करें। बिना मास्क कोई भी दुकानदार ग्राहक को सामान न दें। इसके साथ ही सडक़ों और बाजारों में हर किसी के लिए मास्क अनिवार्य किया जाए। पुलिस बल लगातार गश्त करे। पब्लिक एड्रेस सिस्टम को और प्रभावी बनाया जाए।
बाहर से आने वालों की हों जांच 
मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के किसी भी राज्य से अथवा विदेश से उत्तर प्रदेश की सीमा में आने वाले हर एक व्यक्ति की ट्रेसिंग-टेस्टिंग की जाए। बस, रेलवे और एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए।  निगरानी समितियों ने कोरोना प्रबंधन में सराहनीय कार्य किया है। तीसरी लहर के दृष्टिगत गांवों और शहरी वार्डों में निगरानी समितियों को पुन: सक्रिए करें।