युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। कुछ अधिकारियों और रियल एस्टेट के कई बिल्डरों के गठजोड़ से जीडीए में भ्रष्टïाचार पनप रहा है। यह आरोप बीजेपी के वरिष्ठ नेता एवं तेजतर्रार पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री पॉर्टल पर जीडीए में फैले भ्रष्टïाचार की सीबीआई या विजलेंस से जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिकायत की है।
पार्षद ने शिकायत की कॉपी मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह, डीएम आरके सिंह, जीडीए वीसी और नगर आयुक्त को भी भेजी है। त्यागी ने शिकायत पूरी विस्तार में की है। उनका आरोप है कि जीडीए ने सांठगांठ कर बिल्डरों को फायदा पहुंचाते हुए नियम के खिलाफ जाकर नक्शे पास कर दिए। नक्शे 2017 में बिना जमीन के स्वामित्व के परीक्षण करे जीडीए के नियोजन विभाग द्वारा नक्शे पास कर दिए गए।
क्रॉसिंग रिपब्लिक के भूखंड संख्या जीएच-1, 12, व 14 में एप्रोच रोड व दोनों भूखंडों के अधिकतम स्वामित्व किसानों का है, मगर जीडीए ने तीनों प्लॉट के नक्शे 2017 पास कर दिए। नियोजन विभाग ने नक्शे को पहले जब वीसी की स्वीकृति के लिए भेजा तो उन्होंने आपत्ति के साथ वापिस कर दिया। बाद में एक दलाल की सांठगांठ के जरिए नक्शे पास हो गए। इसमें नगर नियोजक आशीष शिवपुरी, राजीव रत्नशाह, व नियोजन विभाग के अपर अभियंता राम मनोहर पर गंभीर आरोप है कि उन्होंने जमीन के स्वामित्व की जांच कराए बिना ही नक्शे पास करने की पत्रावली को अग्रसारित कर दिया। इन्हीं नक्शो के पास होने के बाद सुपरटेक, पंचशील व एसोटैक बिल्डर द्वारा वित्त संस्थाओं से लोन लेकर प्लॉट को आम लोगों को बेचा जा रहा है। जीडीए की इस गलती के कारण गांव डूंडाहेड़ा में 30 से 40 फुट के दो मुख्य रास्ते थे लेकिन क्रॉसिंग रिपब्लिक के बिल्डर और जीडीए के अधिकारियों के गठजोड़ से गलत पास हुए नक्शों के कारण मौके से रास्ते गायब कर दिए। इससे सरकार को कई सौ करोड़ रुपये की चपत लगी। त्यागी ने मुख्यमंत्री से कहा कि अगर क्रॉसिंग रिपब्लिक समेत वेब सिटी, राजनगर एक्सटेंशन अन्य इलाकों में कब्जाए गए रास्तों की जमीन की जांच हो तो यह कई सौ करोड़ रुपये का घोटाला हो सकता है। आरोप है कि जीडीए अधिकारियों की मिलीभगत के चलते महागुन बिल्डर ने महागुन मानटेज प्रोजेक्ट का सेटबैक का क्षेत्र डूंडाहेड़ा गांव के रास्ते में दर्शाकर नक्शा पास कराया। बाद में इस बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से बहुमंजिला इमारत बनानी शुरू कर दी गई। पंचशील बिल्डर पर आरोप है कि उन्होंने पंचशील स्क्वायर मॉल डूंडाहेड़ा गांव के रास्ते की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर बनाया। इसके अलावा पंचशील वेलिंग्टन सॉसायटी के अपने प्लॉट का कुछ भाग गार्डेनिया स्क्वायर बिल्डर ने बिना सेटबैक नक्शे के बना दिया।