पंचायत चुनाव में सूपड़ा साफ होने का कांग्रेस में नहीं हो रहा मंथन
दूसरे जनपदों में जीत दर्ज करने वालों को बधाई दे रहे कांग्रेसी नेता
युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। कहा जाता है कि इंसान गलतियों से सबक लेकर ही आगे बढ़ता है। यदि, किसी को अपनी गलती का अहसास ही नहीं हो रहा हो तो उसे क्या कहा जाएगा? जिला पंचायत चुनाव होने के बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की भी पोल खुल चुकी है। खासकर, जनपद में पार्टी के हाथों से तोते उड़ चुके हैं। मजे की बात है कि इस हार के लिए जि़म्मेदार लोगों के हाथ वालों के चेहरों पर हार की कसक तक नहीं है। ऐसे कारनामे हो रहे हैं जिसे सिर्फ और सिर्फ हार पर परदा डालना कहा जाएगा। पंचायत चुनाव को पलीता लगाने वाले अब दूसरे जनपद में जीते कांग्रेसियों को बधाई संदेश दे रहे हैं। जबकि, कांग्रेस के आम कार्यकर्ता इस हार को नहीं पचा पा रहे हैं और सोशल मीडिया पर हार के जि़म्मेदारी ना लेने वालों को खूब खरी-खोटी सुनाई जा रही है।
कांग्रेस ऐसी पार्टी है जिसका जनपद में वर्चस्व रहा है। पार्टी ने यहां सांसद और विधायक दिए हैं। सुरेंद्र प्रकाश गोयल जैसे नेता पार्टी से निकले हैं जिन्होंने पार्षद से लेकर सांसद तक का सफर तय कर अपनी कुशल राजनीतिक रणनीति का लोहा पार्टी के नेताओं से ही नहीं बल्कि दूसरी पार्टियों से भी मनवाया है। खैर, आज के दौर में पार्टी उत्तर प्रदेश की सियासी सरजमीं पर पांव रखने के लिए जूझ रही है। पार्टी हाईकमान को उम्मीद थी कि जिला पंचायत चुनाव कांग्रेस की इस उम्मीद को थोड़ा सहारा देंगे लेकिन वहां भी कांग्रेस के हाथ असफलता ही लगी है। कम से कम जनपद में तो कांग्रेस की उम्मीदों को धक्का ही लगा है। पंचायत चुनाव से पूर्व चलाए गए सारे कार्यक्रम और अभियान तो फेल हो ही गए हैं, चुनाव में टांग फंसाने वाले नेताओं की पोल भी पंचायत चुनाव परिणाम ने खोलकर रख दी है। एक वार्ड में टिकट दिलाने को लेकर कुछ कांग्रेसियों ने प्रतिष्ठा को ही प्रश्न बना लिया था। इनकी मंशा भी पार्टी हाईमान में बैठे लोगों के आशीर्वाद से पूरी हो गई। उसके बाद जमकर फूल मालाओं एवं फोटो सैशन का दौर चला। खैर, प्रतिष्ठा के इस टिकट का परिणाम भी अब हार के रूप में सामने आ चुका है। जिस कार्यकर्ता का टिकट इस वार्ड से कटा, अब वे भी सोशल मीडिया पर नए व्यक्ति को टिकट दिलाने में कांग्रेसियों की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। खैर, ये सबकुछ बीत चुका है। अब आगे बढ़कर असफलताओं से सीखने का वक्त कांग्रेसियों के लिए शुरू हुआ है। मजे की बात यह है कि कांग्रसी हम नहीं सुधरेंगे की तर्ज पर यहां भी ऐसा कुछ कर रहे हैं जिसकी मजाक पार्टी के ही कार्यकर्ताओं में बन रही है। टिकटबाजी के इस खेल में सक्रिय दिखे कांग्रेसी अब दूसरे जनपदों में जीत का डंका पीट रहे हैं। सैकड़ों किलोमीटर हुई कांग्रेस के प्रत्याशियों की जीत पर बधाई देने के लिए ये फिर से सक्रिय हो गए हैं। लगता है कि दो दिन पूर्व जनपद की सभी सीटों पर हार को इन कांग्रेसियों ने अपने जहन से निकाल दिया है। हां, हार पर मंथन कोई नहीं कर रहा है। दूसरे जनपद में हुई कांग्रेसियों की जीत पर ये बधाई संदेश देकर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जैसी बात जरूर कर रहे हैं। पता नहीं भगवान इन कांग्रेसियों को सद्बुद्घि आखिर कब देगा?