प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद। यहां पर लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर और पुलिस अधिकारियों के बीच जो शब्दों के तीर चल रहे हैं वो कोई नई बात नहीं है। केवल मौजूदा पुलिस अधिकारियों से ही नहीं कई पूर्व पुलिस कप्तानों से भी भाजपाइयों का खूब पंगा हो चुका है। फर्क इतना है कि जब भाजपाई विपक्ष में थे और आज सत्ता में हैं। नंदकिशोर गुर्जर इससे पहले भी जब अजगर सेना चलाते थे तब बसपा सरकार में उनका पंगा उस समय जिले के कप्तान रहे रघुवीर लाल से हो गया था। बाकायदा गांवों में घूम-घूमकर नंदकिशोर गुर्जर ने कप्तान के खिलाफ आवाज उठाई थी। सपा सरकार में गाजियाबाद के एसएसपी रहे नवीन अरोड़ा का पंगा पूर्व सांसद डॉ. रमेश चंद तोमर एवं भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष विजय मोहन से हो गया था। इस पंगे ने इतना भयंकर रूप ले लिया था कि बाकायदा एसएसपी के खिलाफ भाजपाइयों ने जनरल डायर के नाम से पोस्टर तक शहर में लगा दिये थे। इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक मोंगा भी एसएसपी के खिलाफ एसएसपी कार्यालय के बाहर टेंट लगाकर बैठ गए थे और बाद में उस समय के सांसद रहे केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के हस्तक्षेप के बाद वो टेंट उखड़ गया था।
इतना ही नहीं कई और बड़े नेताओं के भी पंगे पुलिस कप्तानों से हुए हैं, लेकिन सरकार में रहते हुए अपनी ही सरकार के अफसरों को कठघरे में खड़े करने का काम नंदकिशोर गुर्जर ने ही किया है। बहुत कम ऐसे सत्तारूढ़ दल के विधायक होंगे जो अपनी ही सरकार के अफसरों को निशाने पर लेते हैं। दरअसल छात्र राजनीति से सियासत में आए नंदकिशोर गुर्जर पहले से ही संघर्षशील रहे हैं और समाजवादी पार्टी में रहते हुए उन्होंने जहां कई आंदोलन किये वहीं छात्र राजनीति में भी उन्होंने प्रशासन के खिलाफ हमेशा आवाज बुलंद की।
इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव में विधायक नंदकिशोर गुर्जर उस समय भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के खिलाफ भी गांव-गांव में पंचायत करने से पीछे नहीं रहे थे। हालांकि बाद में नंदकिशोर पार्टी में शामिल हो गए। छात्र राजनीति में नंदकिशोर गुर्जर और यतेंद्र नागर की जोड़ी साथ चलती थी। समय बदला नंदकिशोर विधायक बन गए और यतेंद्र नागर टिकट का इंतजार करते रहे। यतेंद्र नागर भी बहुत ही जुझारू छात्र नेता रहे, लेकिन पार्टी ने उन्हें वो सम्मान नहीं दिया जिसके वो हकदार थे। मौजूदा हालात में पुलिस कप्तान पवन कुमार, एसपी ग्रामीण इरज राजा और विधायक नंदकिशोर गुर्जर के बीच शब्दों के तीर चल रहे हैं। हालांकि पुलिस कप्तान और एसपीआरए की ओर से बहुत ही शालीनता के साथ जवाब दिये जा रहे हैं, लेकिन जिस तरह के आरोप लग रहे हैं उससे कहीं ना कहीं समन्वय व आपसी तालमेल की कमी दिखाई दे रही है। जब राजनेता और पुलिस के बीच इस तरह की चीजें होती हैं तब समाज में अच्छा संदेश नहीं जाता। इसलिए जरूरत इस बात की है कि अखबारों और पत्र व्यवहार के बिना आपस में बैठकर बात हो ताकि समाज में अच्छा संदेश जाए। एक-दूसरे के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप से समाज में अच्छा संदेश नहीं जाता और इसका लाभ दूसरे लोग भी उठा सकते हैं जो समाज के लिये भी ठीक नहीं है और जिले के लिए भी ठीक नहीं हैं। पुलिस एक अनुशासित फोर्स है और उसके कुछ दायरे भी हैं। स्वच्छ राजनीति में भी कुछ दायरे हैं इसलिए जरूरी है एक दूसरे के साथ बातचीत से रास्ता खुले, समन्वय बने और जिले को कैसे और मजबूत किया जाये इस पर सभी बैठकर बात करें वरना अगर यही चलता रहा तो जिले की व्यवस्था पर भी फर्क पड़ता है और चुनावी मौसम में लोग इसका फायदा उठा सकते हैं।