गाजियाबाद (युग करवट)। गाजियाबाद के प्रथम मेयर स्व. दिनेश चन्द गर्ग जी की इच्छा थी कि उनका बेटा अतुल गर्ग देश के बड़े सदन लोकसभा के सदस्य बनें। वो नहीं चाहते थे कि अतुल गर्ग विधायक का चुनाव लड़े। ये बात दो दशक पहले एक खास मुलाकात में दिनेश चन्द गर्ग ने साझा की थी। जिस वक्त ये बात साझा की गई थी उस समय अतुल गर्ग राजनीति में नहीं थे। वो केवल कारोबार संभाल रहे थे। इस बीच एक दिन डीसी गर्ग जी का फोन आया और उसके बाद मेरी मुलाकात दिनेश चंद गर्ग से हुई कई बिन्दुओं पर बातचीत के बाद उन्होंने इच्छा जताई कि मेरी इच्छा है कि अतुल को सक्रिय राजनीति में आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि अतुल लोकसभा का चुनाव लड़े और जनता की सेवा करे। अतुल गर्ग ने भी उस समय राजनीति में आने का फैसला किया और अपने पिता की इच्छा के अनुसार लोकसभा चुनाव के टिकट के लिए ही प्रयास शुरू किये लेकिन परिस्थितियां नहीं बन पायी। इसी बीच अपने पिता दिनेश चंद गर्ग विरासत संभालते हुए उन्होंने दिल्ली में बैठे भाजपा के बड़े नेताओं से अपने संपर्क बनाये क्योंकि दिनेश चंद गर्ग परिवार को दिल्ली बैठे सभी लोग भलीभांति जानते थे और उसी की बदौलत अतुल गर्ग को बड़े नेताओं से मिलने का समय आसानी से मिल जाता था। उस वक्त उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं मिला और फिर वो यूपी विधानसभा में दो बार विधायक बने, मंत्री बने, लेकिन भाजपा हाईकमान ने २०२४ के लोकसभा चुनाव में एक पिता की इच्छा को पूरा किया। बहुत कम लोग ये जानते हैं कि दिनेश चंद गर्ग सिर्फ और सिर्फ अतुल गर्ग को एमपी बनता देखना चाहते थे। भले ही वो आज दुनिया में नहीं हो लेकिन भाजपा हाईकमान ने उनकी इच्छा को दो दशक बाद पूरा किया। नि:संदेह उनकी आत्मा को प्रसन्नता होगी।