लोकसभा चुनाव २०२४
लोकसभा चुनाव २०२४ को देखकर लगता था कि इस बार चुनाव में जिहाद, पाकिस्तान, शरियत, संविधान खतरे में है, ये शायद मंचों से दूर हो जाएगा। लेकिन दो चरणों के बाद तीसरे चरण के प्रचार में हर बार की तरह इस बार भी चुनाव में पाकिस्तान का जिक्र आ ही गया। मंचों से कहा जाने लगा कि एक दल के नेता का प्रधानमंत्री बनने का इंतजार पाकिस्तान कर रहा है। और यदि वो प्रधानमंत्री बना तो पाकिस्तान में खुशियां मनाई जाएगी। हालांकि इससे पहले पाकिस्तान के लोगों को आटे के लाले पड़ रहे हैं इसका जिक्र भी हो चुका था। दरअसल, पाकिस्तान आज खुद अपनी हरकतों से परेशान है। जिस आतंकवाद को उसने बढ़ाया, आतंकियों को पनाह दी आज वही उसके लिए सिर दर्द बन गया है। जाहिर है कि जो दूसरों के लिए गड्ढे खोदता है वो खुद ही गिरता है। यही हाल पाकिस्तान का है। लेकिन हमारे यहां की राजनीति में चाहे कोई भी दल हो अगर पाकिस्तान का जिक्र नहीं करेगा तो उसका भाषण पूरा नहीं होगा। जबकि जिसके यहां खुद आटे के लाले पड़े हो उसका हम जिक्र क्या करें। आज भारत विश्व में एक मजबूत स्थिति में खड़ा हुआ है। आज विश्व भारत की एकता अखंडता की जहां सराहना करता है तो वहीं अमेरिका जैसा देश भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ करते हुए नहीं थकता, ऐसे में हम चुनाव में पाकिस्तान का जिक्र करते हैं। अब इस तरह के भाषणों से परहेज करना चाहिए। अब जनता भी यही कहती है कि मरे हुए का क्या जिक्र करें। इतना ही नहीं पाकिस्तान का नाम आते ही हर भारतीय का खून खौल जाता है क्योंकि उसकी नापाक हरकतें सबके सामने हैं। बात विकास की होना चाहिए। भारत को हम कैसे ऊंचाइयों पर लेकर जाएं इसका संकल्प लेना चाहिए। इस तरह के भाषण होना चाहिए क्योंकि आज का युवा विकास चाहता है, विश्वास चाहता है अब वो इस तरह के भाषणों पर तालियां नहीं बजाता। हो सकता है कुछ प्रतिशत लोग इस पर तालियां बजाएं। लेकिन अधिकतर ऐसे भाषण पसंद नहीं करते। हो सकता है कि गृहमंत्री के उस बयान पर कि कांगे्रस जिसकी वजह से राम मंदिर के उद्घाटन में नहीं गई हम उनसे नहीं डरते कुछ प्रतिशत लोग जरूर तालियां बजा सकते हैं लेकिन प्रधानमंत्री का वो नारा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास इस पर लोग ज्यादा भरपूर तालियां बजाते हैं और सभी का समर्थन मिलता है। चाहे कोई भी दल हो उसकी धर्म और जाति के आधार पर राजनीति को लोग पसंद नहीं करते लेकिन देखा ये जा रहा है कि चुनावी मौसम में राजनीति केवल और केवल धर्म और जाति के आासपास ही घूम रही है। दस साल में मोदी सरकार की उपलब्धियां कम नहीं है। अगर उपलब्धियों पर नजर डालें तो कम समय में बहुत कुछ देश में हुआ है। लेकिन न जाने क्यों दो चरणों के बाद जिस तरह के भाषण हो रहे हैं उसकी उम्मीद नहीं थी। देश को कैसे आगे ले जाएं, किस तरह विकास, आपस में मिलकर रहे, सौहार्द मजबूत हो, इस पर ही अब भाषण हो तब देश की तस्वीर और अच्छी होगी और भारत मजबूत होगा। जय हिंद