युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। भाजपा ओबीसी मोर्चा में जब से मनोज यादव को महानगर अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, तभी से पार्टी के ओबीसी कार्यकर्ताओं में भारी रोष और नाराजगी दिखाई दे रही है। यह रोष और नाराजगी पार्टी के लिए नुकसानदेय साबित हो सकती है। पार्टी के ओबीसी कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे वक्त जब पार्टी ने ओबीसी वोटों को अपनी ओर करने के लिए पूरी ताकत झोक दी है, महानगर अध्यक्ष का कार्यकर्ताओं के प्रति रवैया पार्टी के लिए घातक बन सकता है।
नाम न छापने की शर्त पर कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि पिछले चार साल से वे ओबीसी समाज को पार्टी के साथ जोडऩे के लिए काम करते आ रहे हैं लेकिन मनोज यादव ने चाटुकारिता और चापलूसी के बल पर महानगर अध्यक्ष का पद हासिल कर लिया। कई मेहनती और कर्मठ कार्यकर्ताओं को नजदअंदाज कर एक ऐसे कार्यकर्ता को ओबीसी महानगर अध्यक्ष बना दिया गया, जो सिर्फ होर्डिंगबाजी और नेताओं से आशीर्वाद लेने को ही अपनी पहली प्राथमिकता मानता है। भाजपा में ऐसे दर्जनों कार्यकर्ता है जो दिन रात ओबीसी वर्ग को पार्टी के साथ जोडऩे के लिए कार्य कर रहे हैं। लेकिन नेताओं की जी-हजूरी कर मनोज यादव ने यह कुर्सी हासिल कर ली है। एक कार्यकर्ता ने कहा कि ऐसे वक्त पार्टी ने ओबीसी समाज को पार्टी से जोडऩे के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, मनोज यादव अपना पूरा समय और एनर्जी अपने आकाओं को खुश करने में लगे हुए हैं। ओबीसी मोर्चा का महानगर अध्यक्ष बने हुए उन्हें एक पखवाड़ा हो गया लेकिन उन्होंने कार्यकर्ताओं की एक भी बैठक नहीं बुलाई है। इसे लेकर पार्टी के प्रदेश स्तर के नेता भी आश्चर्यचकित है।
ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व सांसद नरेंद्र कश्यप ने युग करवट से कहा था कि पार्टी इस बार ओबीसी वोटों के सहारे विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करेगी। 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा को ओबीसी का सबसे ज्यादा वोट हासिल हुए थे। 2022 के चुनाव में फिर से ओबीसी वोटों को अपनी ओर करने के लिए पार्टी ने ताकत झोंक दी है। वहीं, मनोज यादव की नियुक्ति के बाद ओबीसी कार्यकर्ताओं की नाराजगी से भाजपा को शहर, साहिबाबाद और मुरादनगर सीटों पर ओबीसी वोट मिलने के आसार कम होते जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर यही रवैया रहा तो पार्टी को महानगर में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।