युग करवट संवाददाता
लखनऊ। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जांच के लिए गठित की गई एसआईटी ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। वहीं यूपी सरकार के वकील महेश जेठमलानी ने भी अपना पक्ष रखा। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। शीर्ष अदालत ने अब फैसले को सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान जांच के लिए गठित की गई एसआईटी ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। एसआईटी ने कहा कि हमने किसानों को कुचलने के आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए यूपी सरकार से दो बार कहा। लेकिन आशीष मिश्रा की जमानत रद्द नहीं हुई। वहीं यूपी सरकार तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि मैं मानता हूं कि यह जघन्य अपराध है लेकिन आरोपी आशीष मिश्रा के भागने का खतरा नहीं है इसलिए अदालत सरकार की ओर से निश्चिंत रहें। यूपी सरकार के वकील ने आगे कहा कि हमने इस मामले की जांच कर रही एसआईटी की रिपोर्ट प्राप्त की है जिसे राज्य सरकार को भेज दिया गया है। इसपर मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन ने कहा कि आपने ये नहीं बताया कि चि_ी कब लिखी गई थी और ये ऐसा मामला नहीं हो जिसमें आप इतना इंतजार करें। बता दें कि लखीमपुर हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत के मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दाखिल की गई अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि एसआईटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को दो बार मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को दी गई जमानत को रद्द करने की सिफारिश की थी। लेकिन जमानत रद्द करने पर कोई विचार नहीं किया गया है। इसकी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं कि केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उस जगह पर थे, जिसमें आठ लोग मारे गए थे, और वे अक्तूबर में यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा अपनाए गए मार्ग में बदलाव के बारे में जानते थे।

आशीष मिश्रा को जमानत मिलने से किसान परिवारों में नाराजगी
नई दिल्ली। लखीमपुर हिंसा मामले में मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत कैंसल होगी या नहीं, इसपर सुप्रीम कोर्ट ने आज सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई में मृतक किसानों के परिवारों की तरफ से पेश वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि हाईकोर्ट ने जमानत देने में कई तथ्यों में ध्यान नहीं दिया। वह बोले कि यह हत्या का गंभीर मामला है। सुप्रीम कोर्ट में कुछ याचिकाकर्ताओं ने कहा कि आरोपी की जमानत रद्द की जानी चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम जानते हैं कि हमें क्या करना है। दूसरी तरफ यूपी सरकार की तरफ से पेश सीनियर वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि आशीष मिश्रा से फ्लाइट रिस्क (भागने का खतरा) नहीं है। मृतक किसानों के परिवारों की तरफ से पेश वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि आशीष के पिता केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा धमकी दे रहे थे। उपमुख्यमंत्री का यात्रा मार्ग बदलने के बावजूद आरोपी उस रास्ते पर गया जिस पर किसान थे। दवे ने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने विस्तृत तौर पर जांच की। वीडियो और ऑडियो, गवाहों सभी पर गौर किया। दुष्यंत दवे ने कहा कि यह मामला आरोपी कि जमानत खारिज करने के लिए बिलकुल उचित है। वहीं आशीष के वकील रंजीत कुमार ने कहा कि पुलिस को किसानों की तरफ से दी गई रिपोर्ट में ही कहा गया है कि गोली से एक किसान मरा। तभी हाई कोर्ट ने गोली न चलने की बात कही। लोगों ने यह भी कहा कि आशीष गन्ने के खेत में भाग गया। घटनास्थल पर गन्ने का खेत था ही नहीं, धान का था।