युग करवट संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी कृषि प्रसार सेवा केन्द्र, नोएडा द्वारा भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) कानपुर के सहयोग से मानव स्वास्थ्य एवं समृद्धि के लिए प्राकृतिक खेती के तहत मूँग और उर्द फसलों पर दलहन उत्पादन कार्यक्रम का आयोजन ग्राम चीती और बीरमपुर ब्लाक जेवर में किया गया। कार्यक्रम में लगभग किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में एमिटी कृषि प्रसार सेवा केन्द्र की प्रभारी डा. नीतू सिंह ने किसानों को परंपरागत खेती पर विषेष बल देते हुए दलहनी फसलों के महत्व के बारे में बताया। इसके साथ ही मृदाजनित रोगों के जैव प्रबंधन हेतु ट्राइकोडर्मा बनाने एवं उपयोग करने की विधि की जानकारी दी। वरिष्ठ शोध अधिकारी रोशन लाल ने मूँग एवं उर्द की खेती की जानकारी देते हुए बताया कि दालें प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत है जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत ही आवश्यक होती है। उन्होंने बताया कि दलहन फसलों की खेती से मृदा में नाइट्रोजन की उपलब्धता में वृद्धि होती है जिसके फलस्वरूप मृदा की उर्वरता में बढ़ोतरी होती है। इस दौरान एमिटी कृषि प्रसार सेवा केन्द्र ने समन्वित कीट प्रबंधन के लिए ट्राइकोगामा कार्ड और फेरोमन ट्रेप के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ ही किसानों को बताया कि वे फसल अवशेष को ना जलाकर डी-कम्पोजर का उपयोग करके पराली प्रबंधन कर सकते हैं, जिससे मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा में वृद्धि होगी।